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    राज्यसभा में मनुस्मृति विवाद गरमाया, खरगे-नड्डा के बीच तीखी नोकझोंक

    नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार, गृह मंत्री अमित शाह और देश की शिक्षा व्यवस्था पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने संसद में पेपर लीक, पुलिस लाठीचार्ज और खाली पड़े शिक्षक पदों का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की।

    देश में 10 लाख शिक्षकों के पद खाली

    मल्लिकार्जुन खरगे ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में लगभग 10 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों को कुलपति (VC) बनाया जा रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

    घटनाओं को रोकने के बजाय 'हेडलाइन मैनेजमेंट' कर रही सरकार

    खरगे ने कहा कि सरकार किसी समस्या या घटना को समय रहते रोकने के बजाय सिर्फ डैमेज कंट्रोल और मीडिया में बने रहने के लिए हेडलाइन मैनेजमेंट करती है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के कारण दोबारा परीक्षा कराना गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालता है। कई छात्र बार-बार यात्रा का खर्च नहीं उठा पाते और दोबारा परीक्षा देने से वंचित रह जाते हैं।

    राज्यों में डबल इंजन सरकार फिर भी पेपर लीक जारी

    कांग्रेसी नेता ने सवाल उठाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां सरकार के नियंत्रण में हैं और कई राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं, फिर भी पेपर लीक नहीं रुक रहे। उन्होंने कहा कि यदि NTA, CBI और ED जैसी संस्थाओं को स्वतंत्रता दी गई होती, तो आज देश में यह नौबत न आती।

    प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए गृह मंत्रालय जिम्मेदार

    दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए खरगे ने कहा कि दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ सीधे गृह मंत्रालय के अधीन काम करती हैं। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बिना इतना बड़ा कदम नहीं उठाया जा सकता। खरगे ने गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर बयान देने की मांग करते हुए कहा कि वे अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।

    सभापति ने सदस्यों से नियमों का पालन करने की अपील की

    सदन में बढ़ते हंगामे के बीच राज्यसभा सभापति ने सदस्यों से नियम 235 और 238 का पालन करने का अनुरोध किया। उन्होंने दोनों पक्षों से एक-दूसरे के भाषण के दौरान लगातार टिप्पणी करने से बचने की अपील की, ताकि चर्चा को अधिक सार्थक बनाया जा सके।

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