पीलीभीत| उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के माधोटांडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लोहरपुरी गांव में हुई उमाशंकर की सनसनीखेज हत्या के मामले का पुलिस ने आखिरकार बड़ा खुलासा कर दिया है। पुलिस की गहन जांच-पड़ताल में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि अपने दूसरे पति के साथ रहने की जिद और रास्ते का कांटा बने पति को हटाने के लिए पत्नी ने ही इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया था। आरोपी पत्नी ने पहले कोल्ड ड्रिंक में 15 नींद की गोलियां पीसकर पति उमाशंकर को पिलाईं और जब वह गहरी नींद में बेहोश हो गया, तो आधी रात को गला दबाकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। हालांकि, बीच में बच्चों के जाग जाने के कारण उसकी पूरी साजिश अधूरी रह गई। पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर स्थानीय न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि इस जघन्य आपराधिक साजिश में उसके कथित दूसरे प्रेमी व पति नकुम भावेश को भी नामजद किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
माधोटांडा थाना क्षेत्र के लोहरपुरी गांव में शुक्रवार की रात उमाशंकर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। जब पुलिस ने आरोपी पत्नी ममता से कड़ाई से पूछताछ की, तो परत-दर-परत यह बात सामने आई कि इस हत्याकांड के पीछे पत्नी ममता और उसके गुजरात निवासी कथित दूसरे पति नकुम भावेश की एक सोची-समझी आपराधिक साजिश थी।
पुलिस के मुताबिक, मूल रूप से चित्तरपुर गांव का रहने वाला उमाशंकर गुजरात में रहकर मजदूरी का काम करता था। वर्ष 2024 में वह अपनी पत्नी ममता और बच्चों को भी अपने साथ गुजरात ले गया था। वहाँ एक स्थानीय फैक्टरी में काम करने के दौरान ममता की मुलाकात गुजरात के जामनगर के रहने वाले नकुम भावेश से हुई।
पति से छिपकर प्रेमी से रचा ली थी शादी
धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और प्रेम संबंध स्थापित हो गए। इसके बाद ममता ने अपने पति उमाशंकर से छिपकर नकुम भावेश से मंदिर में शादी भी कर ली। जब इस बात की भनक उमाशंकर को लगी, तो पति-पत्नी के बीच भारी विवाद शुरू हो गया। इस कलह के बाद महज एक महीने के भीतर ही उमाशंकर अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर वापस अपने पैतृक गांव लौट आया, लेकिन इसके बावजूद ममता का संपर्क गुजरात में बैठे नकुम के साथ लगातार बना रहा और दोनों फोन पर लंबी बातचीत करते रहे।
दूसरे पति को लेकर घर में शुरू हुआ आए दिन का क्लेश
आरोपी नकुम इसके बाद पूरनपुर आकर ममता से छिपकर मिलने लगा। इसी बात को लेकर घर में पति-पत्नी के बीच आए दिन खूनखराबे जैसी नौबत और झगड़े होने लगे। पुलिस पूछताछ में ममता ने खुद स्वीकार किया कि घटना से पांच दिन पहले ही उमाशंकर गुजरात से वापस घर लौटा था, जिसके बाद नकुम भावेश को लेकर घर में विवाद और ज्यादा बढ़ गया। आखिरकार 31 जुलाई को ममता ने नकुम को फोन किया और पति से अत्यधिक परेशान होने की बात कही।
अनिद्रा की गोलियों का किया गया खतरनाक इस्तेमाल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इसी बातचीत के दौरान दोनों ने मिलकर उमाशंकर को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का खौफनाक षड्यंत्र रचा। शुरुआत में किसी जहरीले पदार्थ से हत्या की योजना बनाई गई थी, लेकिन बाद में यह तय हुआ कि उमाशंकर को दी जाने वाली नींद की गोलियों का ही इस्तेमाल किया जाए, ताकि किसी को भी किसी प्रकार का शक न हो। दरअसल, उमाशंकर को अनिद्रा (Insomnia) की बीमारी थी जिसके कारण वह कभी-कभी नींद की गोलियां खाता था और दवा घर पर ही रखी रहती थी।
मासूम बेटी के हाथ भेजा मौत का गिलास
शुक्रवार की शाम को आरोपी ममता बाजार से कोल्ड ड्रिंक खरीदकर लाई। उसने करीब 15 नींद की गोलियों को बारीक पीसकर उस कोल्ड ड्रिंक में मिला दिया। शाम को लगभग पाँच बजे जब उमाशंकर काम से घर लौटा, तो वह छत पर पड़ी चारपाई पर आराम करने के लिए चला गया। इसके बाद ममता ने अपनी मासूम बेटी गीता को यह कहकर वह गिलास थमाया कि इसमें एक गोली घुली है, जिसे पीने से उसके पिता को अच्छी और गहरी नींद आ जाएगी।
उस नासमझ बच्ची ने अनजाने में वही जहरीली कोल्ड ड्रिंक अपने पिता को जाकर पिला दी। कुछ ही देर में उमाशंकर गहरी नींद में डूब गया। शाम करीब सात बजे जब उनका बेटा विकास उर्फ विवेक घर आया और उसने कई बार अपने पिता को खाने के लिए बुलाने ऊपर छत पर जाना चाहा, तो ममता ने उसे यह कहकर रोक दिया कि तुम्हारे पापा सो रहे हैं, उन्हें परेशान मत करो।
बच्चों के जागने से खुली पोल और सामने आया सच
रात करीब नौ बजे जब घर के बाकी बच्चे खाना खाकर सो गए, तब ममता ने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया। उमाशंकर की छटपटाहट और दम घुटने की आवाज सुनकर जब बेटा अचानक छत पर पहुँचा, तो ममता वहाँ से तुरंत भाग खड़ी हुई। पुलिस के अनुसार, मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन और ठुड्डी पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जिससे गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि पूरी तरह से हो गई है।
बदमाशों की लूटपाट का ड्रामा रचने की थी पूरी तैयारी
पुलिस की तफ्तीश में यह भी एक अहम बात सामने आई है कि हत्या को अंजाम देने के बाद ममता इस पूरी वारदात को किसी बाहरी बदमाशों द्वारा की गई लूटपाट और हत्या का रूप देना चाहती थी। इसके लिए उसने पहले से ही पूरनपुर बाजार से एक सीढ़ी खरीदकर घर में छिपा रखी थी।
इतना ही नहीं, उसने अपने घर के सारे जेवरात भी एक पोटली में अलग निकालकर रख लिए थे, ताकि पुलिस और ग्रामीणों को यह कहानी सुनाई जा सके कि अज्ञात बदमाश घर में घुसे और लूटपाट के दौरान उमाशंकर की हत्या कर फरार हो गए। हालांकि, ऐन वक्त पर बच्चों के जाग जाने और विरोध करने के कारण उसकी यह शातिर चाल कामयाब नहीं हो सकी।
गुजरात के प्रेमी पर भी कसा शिकंजा
क्षेत्रीय क्षेत्राधिकारी (CO) विधि भूषण मौर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी महिला ममता के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर गुजरात के जामनगर निवासी नकुम भावेश को भी इस आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy) में मुख्य आरोपी बनाया गया है।
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि उसी ने फोन पर लगातार उमाशंकर को रास्ते से हटाने के लिए उकसाया था और ममता को यह भरोसा दिलाया था कि हत्या की इस घटना के बाद वह उसे अपने साथ ले जाकर रखेगा। पुलिस अब नकुम की इस पूरे मामले में भूमिका की गहराई से जांच कर रही है और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।


