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    मध्य प्रदेश के किसान होंगे कर्ज मुक्त, ब्याज माफी प्रस्ताव पर आज कैबिनेट में फैसला संभव

    भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार प्रदेश के किसानों को एक बड़ी राहत देने की तैयारी में है। राज्य सरकार आज होने वाली कैबिनेट बैठक में डिफाल्टर घोषित हो चुके हजारों किसानों का ब्याज माफ करने संबंधी सहकारिता विभाग के प्रस्ताव पर अहम फैसला ले सकती है। इस निर्णय के बाद प्रभावित किसान सोसायटियों से दोबारा खाद और बीज प्राप्त करने के पात्र हो सकेंगे।

    समिति पदाधिकारियों की गड़बड़ी का शिकार हुए किसान

    मध्य प्रदेश सरकार किसानों को रबी और खरीफ फसलों के लिए जीरो फीसदी (0%) ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराती है, जिसे फसल आने पर चुकाना होता है। हालांकि, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के पदाधिकारियों की अनियमितताओं और धोखाधड़ी के कारण 5 हजार से अधिक किसान डिफाल्टर की श्रेणी में आ गए:

    • रकम जमा होने के बावजूद रिकॉर्ड में कमी: कई किसानों ने लोन की राशि समितियों में जमा कर दी थी, लेकिन पदाधिकारियों ने उसे बैंक खातों में जमा नहीं किया।

    • अनाधिकृत लोन: कई मामलों में किसानों को सूचित किए बिना उनके 'किसान क्रेडिट कार्ड' (KCC) का उपयोग करके कर्ज उठा लिया गया और समय पर नहीं चुकाया गया।

    इन गड़बड़ियों के चलते ब्याज पर ब्याज जुड़ता गया और निर्दोष किसान डिफाल्टर हो गए। यद्यपि सरकार ने दोषी पदाधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की है, लेकिन किसानों को राहत मिलना बाकी था।

    कैबिनेट में ब्याज माफी का प्रस्ताव

    सहकारिता विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जा रहा है। इसके मुख्य बिंदु हैं:

    • ब्याज पर लगे ब्याज की माफी: सरकार किसानों पर चढ़े ब्याज की राशि को माफ करने पर विचार कर रही है, ताकि उनका डिफ़ॉल्ट स्टेटस हटे और वे आगामी फसलों के लिए सोसायटियों से खाद व बीज ले सकें।

    • अन्य योजनाओं की निरंतरता: बैठक में इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक अन्य प्रस्तावों और विभिन्न राज्य स्तरीय योजनाओं को निरंतर रखने की मंजूरी दी जा सकती है।

    अब साल में केवल एक बार चुकाना होगा कर्ज

    इससे पूर्व भी मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया था। पहले किसानों को रबी और खरीफ फसलों के लिए वर्ष में दो बार (जून और मार्च में) छह-छह महीने के भीतर कर्ज चुकाना पड़ता था। सरकार ने इस अवधि को बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया है। अब किसान साल में एक बार लोन लेकर उसे एक साल की अवधि के भीतर चुका सकेंगे।

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