मऊगंज| एक ऐसा शिक्षक जिसकी कक्षा का दायरा कभी समाप्त नहीं होता और एक ऐसा गुरु जो दुनिया से विदा होने के बाद भी मेडिकल के विद्यार्थियों को शिक्षा देगा। यह प्रेरणादायक कहानी मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के एक ऐसे अनूठे सेवानिवृत्त शिक्षक की है, जिन्होंने समाज के सामने इंसानियत, सेवा और परोपकार की एक बेहद अनूठी मिसाल पेश की है। 63 वर्षीय देवेंद्र सिंह ने यह संकल्प लिया है कि उनकी सांसें भले ही थम जाएं, लेकिन उनका नश्वर शरीर मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को अध्ययन कराने के काम आता रहेगा। इसके लिए उन्होंने हाल ही में औपचारिक रूप से देहदान का शपथ-पत्र जिला कलेक्टर को सौंपकर अपनी अंतिम इच्छा जाहिर की है।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को सौंपा देहदान का शपथ-पत्र
मऊगंज जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम कंजरा के रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक देवेंद्र सिंह खुद कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने कलेक्टर संजय कुमार जैन से मुलाकात कर उन्हें अपना देहदान का शपथ-पत्र सौंपा। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों को तालीम देने में बिता दी, और अब वह अपनी मृत्यु के उपरांत भी मेडिकल के विद्यार्थियों को पढ़ाना चाहते हैं।
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज को पार्थिव शरीर दान करने की है इच्छा
देवेंद्र सिंह ने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए बताया कि उनके निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर रीवा स्थित प्रतिष्ठित 'श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय' (श्याम शाह मेडिकल कॉलेज) को सौंप दिया जाए, ताकि वहां के मेडिकल छात्र मानव शरीर रचना का सूक्ष्म अध्ययन कर भविष्य में एक बेहतर और कुशल चिकित्सक बन सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अत्यंत संवेदनशील निर्णय लेने से पहले उन्होंने अपने परिवार के सभी सदस्यों से पूरी चर्चा की थी और सभी की सहमति प्राप्त की है।
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने की इस महान निर्णय की सराहना
सेवानिवृत्त शिक्षक द्वारा लिए गए इस महादान के निर्णय की जिला कलेक्टर संजय कुमार जैन ने खुले दिल से सराहना की। कलेक्टर ने कहा कि ऐसे दूरदर्शी और साहसिक फैसले समाज को एक नई दिशा व सकारात्मक सोच देते हैं, साथ ही चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान (रिसर्च) के क्षेत्र को भी मजबूती प्रदान करते हैं। इस अवसर पर देवेंद्र सिंह ने जिले के तमाम नागरिकों से भी अपील की कि वे आगे आएं और देहदान जैसे महान तथा पुनीत कार्य में अपना योगदान दें।
"एक सच्चा गुरु कभी रिटायर नहीं होता"
यह बात बिल्कुल सच साबित होती है कि एक सच्चा शिक्षक केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि अपने जीवन के आचरण और फैसलों से भी पूरी दुनिया को शिक्षा देता है। शिक्षक देवेंद्र सिंह ने यह साबित कर दिया है कि एक सच्चा गुरु कभी सेवानिवृत्त (रिटायर) नहीं होता; उनकी आखिरी पाठशाला मेडिकल कॉलेज का अध्ययन कक्ष होगी और उनके छात्र भविष्य के डॉक्टर होंगे। "मौत के बाद भी पढ़ाऊंगा बच्चों को" महज एक वाक्य नहीं, बल्कि पूरे समाज को एक नया और सकारात्मक संदेश देने वाला विचार है।


