रायपुर| छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की पुलिस ने 45 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय राशि का निवेश कराने के नाम पर 1.13 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो शातिर महिला आरोपियों को महाराष्ट्र के नागपुर शहर से दबोचने में सफलता प्राप्त की है। इन आरोपियों ने खुद को एक बड़े निवेश संस्थान का प्रतिनिधि बताकर एक कंपनी के निदेशक (डायरेक्टर) को अपने जाल में फंसाया था।
नागपुर से गिरफ्तार हुईं दो शातिर महिला आरोपी
पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के दौरान पकड़ी गई महिलाओं की पहचान कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (निवासी कोलकाता) और दीपिका पालीवाल (निवासी उदयपुर, राजस्थान) के रूप में हुई है। पुलिस की विस्तृत जांच-पड़ताल में यह बात सामने आई है कि दोनों आरोपित महिलाएं पिछले लगभग 15 वर्षों से एक सक्रिय और शातिर ठग गिरोह से जुड़ी हुई हैं। यह गैंग नागपुर और लखनऊ समेत देश के विभिन्न अन्य राज्यों में भी इसी तरीके से लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगाने की कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के बाकी फरार सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
कैसे बुना गया था ठगी का पूरा जाल?
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बालोद जिले के ग्राम बोरिदकला निवासी उमेश कुमार सिन्हा, जो 'सालिक ग्रीन रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी के डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, ने रायपुर के तेलीबांधा थाने में इस संबंध में आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी के विस्तार और एक नए प्लांट की स्थापना के लिए कुल 45 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की आवश्यकता थी।
इसी वित्तीय जरूरत के सिलसिले में उनकी मुलाकात राकेश कौशिक के जरिए दीपक सिंह, अभिषेक सिंह, योगी और कुछ अन्य लोगों से हुई थी। इन सभी आरोपियों ने खुद को बेहद प्रभावशाली हस्तियों और अमीर विदेशी निवेशकों के संपर्क में होना बताया, और बहुत ही शातिर तरीके से उन्हें आसानी से लोन या निवेश दिलवाने का भरोसा दिलाकर अपने झांसे में ले लिया था।


