इंदौर: मध्य प्रदेश के पहले 'सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ' का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। बाणगंगा स्थित मानसिक चिकित्सालय में 22 करोड़ 23 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा किया जाना था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह अधूरा पड़ा है। अंतिम चरण में पहुंचे इस निर्माण कार्य पर रिवाइज्ड एस्टीमेट की स्वीकृति, लगभग दो करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट और फंड की कमी के कारण एक बार फिर ब्रेक लग गया है। इससे पहले भी भुगतान और बजट की कमी के चलते यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तीन बार ठप हो चुका है।
टेंडर की शर्तों और भुगतान में देरी से अटका काम
इस प्रोजेक्ट के टेंडर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की प्लानिंग इम्प्लीमेंटेशन यूनिट के माध्यम से जारी किए गए थे, जिसकी कुल लागत 22 करोड़ 23 लाख रुपये तय हुई थी। भोपाल की एक एजेंसी ने कम दर पर लगभग 17.5 करोड़ रुपये में इसका ठेका लिया था। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 24 महीने की समय-सीमा तय की गई थी, परंतु फंड जारी होने में लगातार हो रही देरी के कारण 48 महीने बीत जाने पर भी काम पूरा नहीं हो सका। शुरुआत में बिजली की एलटी लाइन शिफ्ट करने में हुई देरी से तीन-चार महीने काम रुका रहा। इसके उपरांत भुगतान में देरी के चलते दो बार लंबे समय तक निर्माण बंद रहा, जिसके बाद बकाया राशि मिलने पर कुछ महीने पहले ही काम पुनः शुरू हुआ था।
अतिरिक्त बजट और प्रशासनिक मंजूरियों का पेच
अतिरिक्त निर्माण और अन्य कारणों से प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता पड़ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग दो करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट और रिवाइज्ड एस्टीमेट की मंजूरी के लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रस्ताव आगे भेजा गया है। इस स्वीकृति के इंतजार में पिछले एक महीने से काम फिर से बंद पड़ा है। इसके अतिरिक्त, निर्माण एजेंसी का लगभग 1.5 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान भी अभी अटका हुआ है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही काम पूरा कर लिया जाएगा। प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय भागीदारी 60:40 के अनुपात में है, जिसमें राज्य के 40 प्रतिशत हिस्से की राशि जारी होने में देरी हो रही है। वर्ष 2016 में बनी इस योजना की प्रारंभिक स्वीकृति में भी काफी विलंब हुआ था।
अस्पताल प्रबंधन की चिंता और प्रोजेक्ट का भविष्य
शासकीय मनोचिकित्सालय प्रबंधन के अनुसार, लंबे समय से निर्माण पूरा होने की प्रतीक्षा की जा रही है और अस्पताल की ओर से संबंधित निर्माण एजेंसी को लगातार कई पत्र लिखे जा चुके हैं। भवन समय पर हैंडओवर हो जाने के बाद उपकरणों और फर्नीचर की खरीद प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, जिसके लिए बजट पहले से स्वीकृत है और आवश्यक स्टाफ पदों की मंजूरी भी मिल चुकी है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत स्वीकृत यह केंद्र बनने से नशा मुक्ति केंद्र के साथ-साथ मनोरोगों के इलाज के लिए कई विशिष्ट केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह संस्थान एक रिसर्च सेंटर के रूप में नए शोधों को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा, जो प्रदेश का अपनी तरह का पहला विशेषज्ञ स्तर का मानसिक स्वास्थ्य केंद्र साबित होगा।


