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    ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर किसानों की पहली वार्ता संपन्न, दस्तावेज उपलब्ध कराने का आश्वासन

    सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर विस्तृत चर्चा, सामाजिक प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट भी मांगी गई

    जयपुर। कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे को निरस्त करने की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट जयपुर के सभागार में 4 अगस्त 2026 को प्रथम चरण की राज्य स्तरीय वार्ता आयोजित की गई। शाम 5 बजे से 6:30 बजे तक चली इस बैठक में सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, मुआवजा और सामाजिक प्रभाव से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

    बैठक की अध्यक्षता जयपुर जिला कलेक्टर आईएएस संदेश नायक ने की। उनके साथ अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह, युगांतर शर्मा, चौमू के उपखंड अधिकारी आशीष शर्मा और सड़क एवं परिवहन विभाग के अधीक्षण अभियंता गिरीश जैन सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

    किसानों की ओर से किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चौमू तहसील से भगवान निठारवाल, राधेश्याम वधाला, पवन चोपड़ा, छुट्टन यादव, गिरिराज देवंदा, जगदीश नेतड़, बाबूलाल गढ़वाल और सांवरमल बोचलिया मौजूद रहे। इसके अलावा रेनवाल, फुलेरा, किशनगढ़, खंडेला, नीमकाथाना और कोटपूतली क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं।

    बैठक के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित मुआवजा देने तथा पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की। उन्होंने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013 की धारा 4(1) से लेकर धारा 6 तक जारी सभी अधिसूचनाओं और दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की।

    सरकार की ओर से अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि संबंधित दस्तावेज और सामाजिक प्रभाव अध्ययन से जुड़ी रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि किशनगढ़ इंटरचेंज के स्थान परिवर्तन का निर्णय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निर्देशों के अनुरूप लिया गया था।

    किसान प्रतिनिधियों ने किशनगढ़-कोटपूतली मार्ग के चयन के आधार के साथ-साथ इसके लिए विचार किए गए अन्य तीन विकल्पों की जानकारी भी मांगी। इसके अलावा सामाजिक प्रभाव अध्ययन के आधार पर तैयार रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी।

    किसानों ने आरोप लगाया कि पारदर्शिता संबंधी प्रावधान लागू होने के बावजूद समय पर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने समानांतर सड़क और रेलवे मार्गों, भूजल स्तर, गांवों के आपसी संबंधों, सांस्कृतिक ताने-बाने और बढ़ते यातायात दबाव जैसे पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किए जाने पर भी चिंता जताई।

    बैठक में जिला कलेक्टर संदेश नायक ने भरोसा दिलाया कि आगामी चरण की वार्ता से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस वार्ता को दोनों पक्षों ने सकारात्मक और रचनात्मक बताया।

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