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    आरती के बाद हाथ आंखों पर क्यों लगाते हैं? परंपरा के पीछे छिपा है विज्ञान

    हिंदू धर्म में पूजा के अंत में आरती करना एक महत्वपूर्ण परंपरा है. मंदिर हो या घर, आरती के बाद ज्यादातर लोग दीपक की लौ के ऊपर दोनों हाथ घुमाकर उन्हें अपनी आंखों और फिर सिर से लगाते हैं. यह दृश्य लगभग हर पूजा में देखने को मिलता है. कई लोग इसे केवल धार्मिक परंपरा मानते हैं, लेकिन इसके पीछे आस्था के साथ-साथ कुछ व्यावहारिक और वैज्ञानिक पहलुओं की भी चर्चा की जाती है. हालांकि, इन वैज्ञानिक कारणों के समर्थन में ठोस चिकित्सा प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इन्हें पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही समझना चाहिए.

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, आरती की लौ भगवान के तेज, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है. जब श्रद्धालु अपने हाथों को लौ की गर्माहट के पास ले जाकर आंखों और माथे पर लगाते हैं, तो इसका अर्थ होता है कि वे ईश्वर के आशीर्वाद और दिव्य ऊर्जा को अपने जीवन में स्वीकार कर रहे हैं. यह एक श्रद्धा और समर्पण का भाव भी दर्शाता है.
    आंखों पर हाथ लगाने की परंपरा क्यों?
    पूजा के दौरान व्यक्ति का ध्यान भगवान की मूर्ति और दीपक की लौ पर केंद्रित रहता है. आरती के बाद हल्की गर्माहट वाले हाथों को आंखों पर लगाने को कई लोग मानसिक शांति और एकाग्रता से जोड़ते हैं. माना जाता है कि इससे पूजा के दौरान महसूस हुई सकारात्मक भावना को कुछ क्षण और बनाए रखने में मदद मिलती है. हालांकि, इसे लेकर कोई स्पष्ट वैज्ञानिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है.

    दीपक की लौ के पास हाथ ले जाने से हथेलियों में हल्की गर्मी महसूस होती है. इसके बाद जब इन्हें आंखों या चेहरे के पास लगाया जाता है, तो कुछ लोगों को आराम और सुकून का अनुभव होता है. यह प्रभाव वैसा ही हो सकता है जैसा ठंड के मौसम में हथेलियों की गर्माहट चेहरे पर महसूस होती है. यह अनुभव व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग हो सकता है और इसे किसी चिकित्सा उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

    मनोवैज्ञानिक महत्व भी है
    धार्मिक अनुष्ठान अक्सर मन को शांत करने और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद करते हैं. आरती के बाद हाथ आंखों पर लगाने की क्रिया भी एक प्रकार का माइंडफुल मोमेंट बन सकती है, जिसमें व्यक्ति कुछ पल के लिए पूजा के भाव में पूरी तरह डूबा रहता है. इससे मानसिक संतुलन और आत्मिक संतोष का अनुभव हो सकता है.
    परंपरा और आस्था का सम्मान
    आज के समय में भले ही हर धार्मिक परंपरा का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध न हो, लेकिन कई रीति-रिवाज सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक आस्था का हिस्सा हैं. आरती के बाद हाथ आंखों पर लगाने की परंपरा भी उन्हीं में से एक है. यह ईश्वर के प्रति श्रद्धा, विनम्रता और सकारात्मक भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम मानी जाती है.

     

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