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    JPSC विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, फिर से परीक्षा कराने की मांग

    नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और धांधली का विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इस बहुचर्चित मामले में नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने और पूरे घटनाक्रम की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की गुहार लगाई गई है।

    ओएमआर कार्बन कॉपी वायरल होने के बाद गरमाया मामला

    यह पूरा विवाद तब खुलकर सामने आया जब दो जुलाई को जेपीएससी की दो हजार पच्चीस की प्रारंभिक परीक्षा में शामिल एक सफल अभ्यर्थी की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। आरोप लगाया गया कि संबंधित छात्र ने पेपर-1 में केवल अड़तालीस प्रश्नों को ही हल किया था, इसके बावजूद उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित कर दिया गया। इस गंभीर अनियमितता के सामने आते ही परीक्षार्थियों में भारी आक्रोश फैल गया और छात्र तब से लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से शीर्ष अदालत में रखी गई प्रमुख मांगें

    अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की गई इस जनहित याचिका में याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि इस प्रारंभिक परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच इसे दोबारा संपन्न कराया जाए। इसके अलावा, ओएमआर शीट की स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का एक स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी ऑडिट कराए जाने की भी पुरजोर मांग की गई है।

    डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का अनुरोध

    याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि मामले से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण साक्ष्यों जैसे कि मूल ओएमआर शीट, कार्बन कॉपियां, उत्तर कुंजियां, उपस्थिति पंजिका, बायोमेट्रिक डेटा और परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब तक इस बात की स्पष्ट जांच नहीं हो जाती कि गड़बड़ी में शामिल और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच का दायरा क्या है, तब तक सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को पूरी सख्ती के साथ संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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