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    Homeराज्यमध्यप्रदेशनर्मदा में बड़ा हादसा टला, छह कांवड़ियों को सुरक्षित बाहर निकाला

    नर्मदा में बड़ा हादसा टला, छह कांवड़ियों को सुरक्षित बाहर निकाला

    बड़वाह (मध्य प्रदेश): श्रावण के पवित्र महीने में नर्मदा नदी से जल भरने और दर्शन करने पहुँच रहे श्रद्धालुओं के बीच सोमवार को नावघाटखेड़ी घाट पर एक बड़ा संकट टल गया। नर्मदा के उफान और गहरे पानी में बहते छह कांवड़ियों की जान पर बन आई थी, जिन्हें स्थानीय जांबाज गोताखोरों ने त्वरित कार्रवाई कर डूबने से बचा लिया। अगर वक्त पर यह बचाव प्रयास न होता तो एक भारी त्रासदी घट सकती थी।

    श्रद्धालुओं की आवाजाही और घाट की सुरक्षा स्थिति

    इंदौर-खंडवा मार्ग पर स्थित मोरटक्का नर्मदा पुल का दक्षिणी तट, यानी नावघाटखेड़ी, इन दिनों कांवड़ यात्रियों से भरा हुआ है। यहाँ से श्रद्धालु उज्जैन स्थित भगवान महाकाल के जलाभिषेक के लिए पवित्र नर्मदा जल भरते हैं। हर दिन हजारों की संख्या में लोगों के आने से घाट पर जबर्दस्त भीड़ बनी रहती है, जहाँ सुरक्षा संबंधी सावधानियों की लगातार अनदेखी भी देखने को मिलती है।

    दोपहर में एक के बाद एक घटित हुई दो घटनाएँ

    सोमवार दोपहर लगभग 12 बजे इंदौर से आए दो कांवड़िए स्नान करते वक्त नदी के तेज बहाव की चपेट में आ गए। उन्हें संघर्ष करता देख गोताखोर बाबूलाल मंगले ने तुरंत नदी में कूदकर ट्यूब के सहारे दोनों को सकुशल बाहर निकाल लिया। इसके ठीक थोड़ी देर बाद एक और हादसे में इंदौर के ही चार अन्य श्रद्धालु गहरे पानी में चले गए। सतर्क गोताखोरों ने तत्परता दिखाते हुए एक बार फिर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों को सुरक्षित तट पर पहुँचाया।

    उफान और लापरवाही से उपजता खतरा

    रेस्क्यू करने वाले गोताखोर बाबूलाल मंगले के अनुसार, श्रद्धालुओं को बार-बार गहरे पानी में न उतरने की सलाह और चेतावनी दी जाती है। इसके बावजूद उत्साह में आकर लोग आगे निकल जाते हैं। नर्मदा नदी का ऊपरी सतह भले शांत नजर आए, लेकिन कुछ ही दूरी पर अचानक गहराई और नीचे का बहाव अत्यधिक तेज होता है, जिससे श्रद्धालु संतुलन खो बैठते हैं।

    सीमित संसाधनों के बावजूद जांबाज गोताखोरों का साहस

    ओंकारेश्वर और नावघाटखेड़ी क्षेत्र के स्थानीय गोताखोर बिना किसी अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण के केवल रबर ट्यूब के सहारे उफनती नदी में उतरते हैं। डूबता हुआ व्यक्ति अक्सर घबराहट में गोताखोर को ही जकड़ लेता है, जिससे बचाने वाले की जिंदगी भी जोखिम में पड़ जाती है। इसके बाद भी ये जांबाज अपनी परवाह किए बिना दूसरों का जीवन बचाने के लिए नदी में कूद पड़ते हैं।

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