बिहार: नालंदा जिले के बिहार शरीफ स्थित 'नवजीवन शिशु अस्पताल' से एक नवजात शिशु के गायब होने और उसकी संभावित तस्करी के सनसनीखेज मामले में पटना हाईकोर्ट ने अत्यंत कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रमेश चंद मालवीय की खंडपीठ ने पुलिस की अब तक की जांच में बरती गई भारी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन के खिलाफ तत्काल प्रभाव से सख्त कानूनी कार्रवाई करने और जांच में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
डॉक्टर पर रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप प्रथम दृष्टया सही
सुनवाई के दौरान नालंदा के पुलिस अधीक्षक ने अदालत को अवगत कराया कि अस्पताल के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार के विरुद्ध लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। जांच में जब्त किए गए दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ है कि 26 मार्च 2023 को अस्पताल में 3.450 किलोग्राम वजन के एक स्वस्थ जीवित बालक का जन्म हुआ था।
जन्म के बाद नवजात को लगभग 17 दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखा गया, लेकिन इस पूरी अवधि के दौरान परिजनों को बच्चे से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। सबसे चौंकाने वाला खुलासा जांच में यह हुआ कि डॉ. ब्रजेश ने खुद प्रवेश रजिस्टर में बड़ी हेरफेर की थी। रजिस्टर में 'मेल' (लड़का) शब्द के आगे 'फी' अक्षर जोड़कर उसे 'फीमेल' (लड़की) में बदल दिया गया था।
आईसीयू में सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था नदारद
पुलिस जांच में अस्पताल के एनआईसीयू (NICU) की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी बेहद गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। अस्पताल के उस संवेदनशील हिस्से में न तो कोई सीसीटीवी कैमरा लगा था और न ही वहां सुरक्षा के लिए कोई गार्ड तैनात था। इसके अतिरिक्त, अस्पताल के प्रवेश और निकास रजिस्टर का रखरखाव भी पूरी तरह से अनियमित पाया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता जताई।
एफएसएल (FSL) रिपोर्ट में देरी पर कोर्ट ने लगाई फटकार
महत्वपूर्ण दस्तावेजों को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजने में हुई अनावश्यक देरी और पुलिस द्वारा पहले दी गई भ्रामक जानकारी पर हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद नालंदा एसपी ने अदालत को बताया कि विवादित रजिस्टर को अब एफएसएल पटना की हस्तलेखन विंग को जांच के लिए भेज दिया गया है। सुनवाई के दौरान हस्तलेखन विंग के निदेशक भी ऑनलाइन माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए और 10 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया। एसपी ने यह भी जानकारी दी कि मामले की जांच में शुरुआती स्तर पर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप अस्पताल पर होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 'पिंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के मामलों में संबंधित अस्पताल का लाइसेंस तत्काल निलंबित किया जाना अनिवार्य है। पुलिस जांच में अस्पताल के खिलाफ आरोप सही पाए जाने के बावजूद, अब तक लाइसेंस रद्द न किए जाने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जाहिर की।
जिलाधिकारी को दो सप्ताह में कार्रवाई का आदेश
अदालत की सख्त फटकार के बाद नालंदा एसपी ने अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई हेतु जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेज दिया है। हाईकोर्ट ने नालंदा के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकतम दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करें। एसपी ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि मामले की सच्चाई उजागर करने के लिए वह स्वयं इसकी रोजाना निगरानी कर रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 15 सि


