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    सिंध स्मृति दिवस पर छलका विस्थापन का दर्द, भारत माता पूजन में गूंजा राष्ट्रप्रेम

    विभाजन की पीड़ा को याद कर सिंधी समाज ने मनाया सिंध स्मृति दिवस, हर घर तिरंगा अभियान के तहत बांटे झंडे

    खैरथल। भारतीय सिंधु सभा खैरथल की ओर से पूज्य झूलेलाल मंदिर में सिंध स्मृति दिवस एवं भारत माता पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिंध की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति की स्मृतियों के साथ विभाजन के दौरान सिंधी समाज को झेलने पड़े विस्थापन और पीड़ा को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सिंधी समाज ने देश के विभिन्न हिस्सों में बसकर राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारतीय सिंधु सभा राजस्थान के प्रदेश महामंत्री गिरधारी लाल ज्ञानानी ने कहा कि वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान पंजाबी, बंगाली, मुस्लिम और सिंधी समाज सहित बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज को अपना अलग प्रदेश नहीं मिला, जिसके कारण समाज के लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर बस गए।

    उन्होंने कहा कि सिंधी समाज आज भी अपनी करीब 4500 वर्ष पुरानी सभ्यता, सिंधु नदी, मोहनजोदड़ो, भगवान झूलेलाल, संत कंवर राम और शहीद हेमू कालानी की जन्मभूमि सिंध की स्मृतियों को जीवित रखने के लिए प्रतिवर्ष 14 अगस्त को सिंध स्मृति दिवस मनाता है। उन्होंने विभाजन के दौरान सिंधी माताओं और बहनों द्वारा झेली गई पीड़ा को भी स्मरण किया।

    कार्यक्रम के दौरान नत्थू मल रामलानी, सिमरन रोघा, नीतू खजनानी और बूलचंद मनवानी ने भजनों एवं अपने वक्तव्यों के माध्यम से सिंध की संस्कृति, परंपरा और स्मृतियों को सामने रखा।

    इस अवसर पर समाज के लोगों ने सिंध की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़ने का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि विस्थापन की पीड़ा के बावजूद सिंधी समाज ने मेहनत, उद्यम और सामाजिक समरसता के माध्यम से देश के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    कार्यक्रम के दौरान हर घर तिरंगा अभियान के तहत तिरंगा झंडों का वितरण भी किया गया। इसके बाद भारत माता का विधिवत पूजन किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

    कार्यक्रम में शिशुपाल रेलवानी, विजय बच्चानी, कर्मचंद लखवानी, अर्जुन दास असरानी, हरिराम रामानी, लक्ष्मण दास भूरानी, कैलाश निहलानी, अजीत मंगलानी, राजा मंगलानी, बाबूलाल गोरवानी, रामचंद्र खटवानी, मोनिका मदान, रेखा शर्मा, हेमलता कांधारी और निशा नावानी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समाजजन मौजूद रहे।

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