नई दिल्ली: देश के स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन और नीति निर्माण में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर विशेष बल दिया। उन्होंने इसे वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए देश के सभी राजनीतिक दलों से दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया।
महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का आग्रह
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि तमाम दलों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश की राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले, ताकि देश के भविष्य की नीतियां तय करने में नारी शक्ति का अभूतपूर्व नेतृत्व और उनकी प्रशासनिक क्षमता का पूरा उपयोग किया जा सके।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम और राजनीतिक खींचतान का जिक्र
पीएम मोदी ने कहा कि स्थानीय शहरी और ग्रामीण निकायों में महिलाओं की असाधारण सफलता को देखते हुए ही संसद के माध्यम से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पारित किया गया था। हालांकि, उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि पिछले कई दशकों से महिलाओं के अधिकार से जुड़ा यह सपना राजनीतिक खींचतान और दांव-पेच का शिकार बनता रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा, "मैं देश के सभी राजनीतिक दलों से पुरजोर आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं और हमारी माताओं-बहनों की असीम ताकत व क्षमता का सम्मान करें। बिना किसी और देरी के हमारी महिलाओं को राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलने का रास्ता साफ किया जाना चाहिए।" प्रधानमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि वे इस ऐतिहासिक कदम का श्रेय आपस में बांटने के बजाय देशहित में इस पर पूर्ण आम सहमति बनाएं।
विधेयक के प्रावधान और सरकार-विपक्ष का रुख
ज्ञात हो कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को संसद के दोनों सदनों में व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ था, जिसके तहत देश की विधायी निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के साथ-साथ भविष्य में लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
केंद्र सरकार का पक्ष: सरकार का यह तर्क है कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब संसद और विभिन्न राज्य विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या में वृद्धि होगी, तब इस महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
विपक्ष का रुख: दूसरी ओर, विपक्ष परिसीमन से जुड़ी इस शर्त का विरोध कर रहा है। विपक्षी दलों की यह मांग है कि महिलाओं के लिए तय यह 33 प्रतिशत आरक्षण भविष्य के परिसीमन का इंतजार किए बिना, मौजूदा समय की कुल सीटों की संख्या के आधार पर ही तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।


