हिंगोली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव से 'स्कूल ठीक करो' नामक एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत करने की तैयारी कर ली है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्ता में चाहे कोई भी राजनीतिक दल क्यों न रहा हो, हमेशा से ही सरकारी स्कूलों की घोर अनदेखी की जाती रही है। दीपके के अनुसार, देश के आम बच्चों को आज भी समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, और गांवों के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति को सुधारने के लिए अब जनता को खुलकर सवाल पूछने होंगे।
सरकारी स्कूलों की बदहाली और राजनीतिक दलों पर निशाना
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव जाने से ठीक पहले, अभिजीत दीपके ने सरकारी शिक्षण संस्थानों की दयनीय स्थिति को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पिछले कई दशकों में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और वहां दी जाने वाली शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए किसी भी सरकार ने पर्याप्त और ठोस प्रयास नहीं किए हैं।
उन्होंने आगे कहा, "अब आम जनता को यह बात अच्छी तरह समझ में आ चुकी है कि उन्हें पढ़ाई, लिखाई और बेहतर शिक्षा के मुद्दों पर खुलकर बात करनी चाहिए। यह वर्तमान समय की सबसे बड़ी और अहम जरूरत है। राज्य में भले ही किसी भी दल की सरकार रही हो, लेकिन ग्रामीण स्कूलों के विकास के लिए किसी ने ईमानदारी से काम नहीं किया। अब समय आ गया है कि हम सवाल पूछकर इन व्यवस्थाओं को सुधारें।"
तिरंगा रैली के बैनरों और खर्च पर उठाए गंभीर सवाल
इससे पहले, शुक्रवार को छत्रपति संभाजीनगर शहर में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में निकाली गई एक विशाल तिरंगा रैली के दौरान शहर में जगह-जगह लगाए गए भारी-भरकम और महंगे बैनरों के वित्तीय स्रोतों पर भी दीपके ने तीखे सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा रैली का आयोजन करना और देशप्रेम दिखाना एक अच्छी बात है, लेकिन इस रैली के प्रचार के लिए हर 40 से 50 फीट की दूरी पर जो बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग लगाए गए, उस पर खर्च हुआ बेहिसाब पैसा कहां से आया? यदि यही सारा पैसा ग्रामीण इलाकों के बदहाल स्कूलों और वहां पढ़ने वाले गरीब छात्रों की भलाई पर खर्च किया जाता, तो यह समाज के लिए अधिक हितकारी होता। नेताओं को अब यह सोचना होगा कि वे आने वाली पीढ़ी और छात्रों का भविष्य संवारना चाहते हैं या केवल दिखावा करना चाहते हैं।"
अभिजीत दीपके का राष्ट्रव्यापी अभियान और बुनियादी सवाल
बता दें कि अभिजीत दीपके ने कुछ समय पूर्व ही देश के गांवों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदलने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की थी। उन्होंने देश के सभी अभिभावकों और माता-पिता से अपील की है कि वे अपने नजदीकी स्कूलों में जाकर वहां मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का खुद ऑडिट करें। इसके अलावा, उन्होंने गांवों के सरपंचों से भी आगे आकर सरकारी स्कूलों की कायापलट करने की नैतिक जिम्मेदारी उठाने का आग्रह किया है।
उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा था, "हमने देश की नई संसद बना ली है, नया प्रधानमंत्री आवास बना लिया है, लेकिन विडंबना यह है कि हम अपने गांवों में बच्चों के लिए नए और आधुनिक सरकारी स्कूल क्यों नहीं खड़े कर पाए? क्या हम देश के गरीब किसानों और मजदूरों के बच्चों को इस महान देश का भविष्य नहीं मानते?" दीपके ने अफसोस जताया कि आज भी ग्रामीण इलाकों के मासूम बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए कई-कई किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, और कई स्कूलों में तो पीने का शुद्ध पानी तथा शौचालय जैसी बेहद बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।


