जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार सुबह एप्रन क्षेत्र में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां एनसीसी (NCC) के एक माइक्रोलाइट विमान और एयरपोर्ट की ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी 'इंडोथाई' के वाहन के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। प्रारंभिक सूचना के मुताबिक, दुर्घटना के वक्त माइक्रोलाइट विमान एप्रन एरिया में ही खड़ा था, तभी ग्राउंड हैंडलिंग में लगे वाहन ने उसे टक्कर मार दी। इस घटना के बाद से ही हवाई अड्डे की ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट प्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
एप्रन कंट्रोल सेंटर की कार्यप्रणाली और समन्वय पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा संशय एप्रन कंट्रोल सेंटर की निगरानी और आपसी तालमेल को लेकर पैदा हो गया है। एप्रन क्षेत्र के भीतर ग्राउंड वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करना और रनवे पर जहाजों की मूवमेंट के साथ संतुलन बनाए रखना नियंत्रण कक्ष का प्राथमिक काम होता है। अब जांच का मुख्य विषय यह है कि एनसीसी के इस विमान के रूट और मूवमेंट की जानकारी कंट्रोल रूम को पहले से थी या नहीं। यदि प्रशासन को इसकी पूर्व सूचना थी, तो फिर वाहन और विमान के बीच सीधी टक्कर कैसे संभव हुई, इसकी गहन समीक्षा की जा रही है।
व्यस्त एयरपोर्ट पर एनसीसी ट्रेनिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर संशय
जयपुर एयरपोर्ट राज्य के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शुमार है, जहां से रोजाना दर्जनों कमर्शियल फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं और लैंड करती हैं। एयर ट्रैफिक का दबाव अधिक होने के कारण यहां हर समय एप्रन और रनवे पर गतिविधियों की रफ्तार तेज रहती है। ऐसे अति-व्यस्त माहौल में एनसीसी के छोटे माइक्रोलाइट विमानों का प्रशिक्षण और सामान्य ग्राउंड वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच सुरक्षा मानकों का कितना पालन हो रहा है, यह चिंता का विषय बन गया है। हादसे में किस स्तर पर लापरवाही हुई है, इसका सही खुलासा विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगा।


