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    वाणी ऐसी हो कि रिश्ते जुड़ें, महाभारत नहीं: आचार्य पुलकसागर

    चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान बोले पुलकसागर महाराज—दुनिया में सबसे जहरीली आदमी की जुबान (वाणी), नीम-करेला तो यूं ही बदनाम

    भीलवाड़ा। किसी से रिश्तों में मधुरता होगी या टकराव, यह हमारी वाणी ही तय करती है। सब कुछ वापस लिया जा सकता है, लेकिन जुबान से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते। शब्दों का घाव दिखाई नहीं देता, लेकिन वह सबसे गहरा और घातक होता है। दुनिया में सबसे जहरीली आदमी की जुबान होती है, नीम और करेला तो यूं ही बदनाम हैं। जिनकी वाणी अच्छी होती है, वे दिल में उतर जाते हैं और जिनकी वाणी तीखी होती है, वे दिल से उतर जाते हैं।

    ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने सोमवार को चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में वाणी के महत्व और प्रभाव पर प्रवचन करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मेन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से किया जा रहा है। महाराज की पुलक वाणी सुनने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग चित्रकूटधाम पहुंचे।

    वाणी में मिठास होगी तो रिश्तों में प्रगाढ़ता आएगी

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि द्रोपदी द्वारा दुर्योधन के लिए ‘अंधे का बेटा अंधा’ कहना उसके अपमान की आग को भड़का गया और इसी एक शब्द ने महाभारत की नींव रख दी। हमारी वाणी की मिठास या कड़वाहट ही तय करती है कि रिश्तों में प्रगाढ़ता आएगी या महाभारत होने वाली है।

    उन्होंने कहा कि हमारे शब्द ऐसे होने चाहिए, जिनमें प्रेम घुला हो। प्रेम से बोले गए शब्दों में व्यंग्य भी हो तो नफरत नहीं बढ़ती। दुनिया शब्दों का खेल है। अच्छे से बोलेंगे तो शांति तैयार होगी और बुरा बोलेंगे तो अशांति पैदा होगी। भोजन से भी अधिक स्वादिष्ट हमारे वचन होने चाहिए।

    आचार्यश्री ने कहा कि कहो वही जो सच्चा हो, करो वही जो अच्छा हो, बोलो वही जो मीठा हो, चाल वही जिसमें चरित्र हो और काम वही जो पवित्र हो। जीवन में आनंद चाहिए तो कम बोलें और ज्यादा सुनें। भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि जीवन में धन-दौलत भले कम मिले, लेकिन अच्छे शब्दों का खजाना भरपूर मिले।

    उन्होंने कहा कि घरों में कलह संपत्ति के कारण कम और जुबान से निकलने वाले बेरहम शब्दों के कारण ज्यादा होती है। वचनों के कारण ही इंसान का जुड़ाव या बिखराव होता है। मीठा बोलने से जिंदगी भी मीठी हो जाती है। कर्कश वाणी के कारण कौए को कोई पसंद नहीं करता, जबकि मीठी वाणी के कारण कोयल सभी को अच्छी लगती है। यदि इंसान की तरह बोलना नहीं आए तो पशु की तरह मौन रहना बेहतर है। शब्द हमारे दर्पण हैं, जो हमारे चरित्र और सभ्यता को प्रदर्शित करते हैं।

    मैं खाता तीखा, लेकिन बोलता मीठा हूं: पुलकसागर

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि तोता मिर्ची खाकर भी मीठा बोलता है और हम मिश्री खाकर भी नीम जैसा बोलते हैं। मैं खाता तीखा हूं, लेकिन बोलता मीठा हूं और आप खाते मीठा हो, लेकिन बोलते तीखा हो।

    उन्होंने कहा कि यदि बोलना सीख गए तो जीवन की 90 प्रतिशत समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी। भगवान महावीर ने सबसे ज्यादा वाणी की साधना की। ईंट का जवाब पत्थर से और गोली का जवाब गोली से देने वाला कभी महात्मा नहीं बन सकता। महापुरुष वे होते हैं जो ईंट का जवाब फूल से देते हैं।

    आचार्यश्री ने कहा कि दुनिया में सर्वाधिक विनाश जुबान के कारण ही होता है। यदि जुबान पर ताला लगाना सीख गए तो जीवन सार्थक हो जाएगा। बोलने का हुनर मिल गया तो जंगल में भी मंगल हो जाएगा।

    जली हुई रोटी नहीं, जले-कटे शब्द जिंदगी बर्बाद करते हैं

    आचार्यश्री ने कहा कि जली हुई रोटी से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन जले-कटे शब्दों से जिंदगी बर्बाद हो जाती है। क्रोध में शब्दों की साधना बिखर जाती है। अपशब्दों के निशान माफी मांगने के बाद भी दिल से नहीं मिटते।

    उन्होंने कहा कि जीवन में जो काम गुस्सा करने से नहीं होता, वह प्रेम से सहज ही हो जाता है। कोई परमात्मा हमारा स्वभाव नहीं बदल सकता, हमें खुद को बदलना होगा। हम जैसा बोलेंगे, वैसा ही जवाब मिलेगा। प्रेम से बोलेंगे तो उत्तर में भी प्रेम ही प्राप्त होगा। जैसा सुनना चाहते हैं, वैसा बोलना शुरू कर दें।

    आचार्य पुलकसागर ने कहा कि धागा और जुबान बहुत लंबी होती है और दोनों उलझ जाते हैं। इसलिए हमेशा धागे को लपेटकर और जुबान को समेटकर रखना चाहिए।

    बच्चों का भविष्य बनाने और बिगाड़ने वाले माता-पिता

    बच्चों की परवरिश को लेकर आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बच्चों का भविष्य बनाने और बिगाड़ने वाले उनके माता-पिता ही होते हैं। वह बच्चा जीवन में तरक्की नहीं कर सकता जिसकी इज्जत उसके माता-पिता नहीं करते, तो दुनिया क्यों करेगी।

    उन्होंने कहा कि बच्चों की खूबियों की बजाय उनकी कमजोरियां उजागर करने से वे कुंठा में जीने लगते हैं। आलोचना व्यक्ति का हौसला तोड़ देती है। माता-पिता को बच्चों की कमजोरी उजागर करने के बजाय उसे दूर करने में सहायक बनना चाहिए। यदि आप अपने बच्चों का हौसला बढ़ाएंगे तो वे अपनी क्षमता से भी अधिक कार्य करके दिखा सकते हैं।

    दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट से हुआ प्रवचन का शुभारंभ

    प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य शकुन्तलादेवी, नंदलाल-सुरेश कोठारी परिवार एवं जीतो के वाइस प्रेसीडेंट महावीरसिंह चौधरी को प्राप्त हुआ। अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया।

    श्री वासुपूज्य महिला मंडल बिलिया की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।

    ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंचे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। वहीं शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर धर्मलाभ ले रहे हैं।

    मोक्ष सप्तमी पर कल निकलेगी भव्य मंगल रथयात्रा

    मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज के भीलवाड़ा चातुर्मास के दौरान 19 अगस्त को मोक्ष सप्तमी के अवसर पर भक्ति का नया इतिहास रचने की तैयारी है। पहली बार श्री पार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याण महोत्सव दिवस पर तीन लोक के नाथ की भव्य मंगल रथयात्रा निकाली जाएगी।

    सकल दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में मंगल रथयात्रा सूर्यमहल से सुबह 7:30 बजे रवाना होगी। उत्तर प्रदेश के बड़ौत से आने वाले पांच एरावत हाथियों सहित श्रीजी के रथ के आगे कुल 10 हाथी चलेंगे। रथयात्रा में सात विशेष झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

    चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि भव्य रथयात्रा में श्राविकाएं ध्वज, डोली, ढोल और मंजीरे लेकर चलेंगी। भीलवाड़ा के महिला मंडलों एवं श्रावकों द्वारा सम्मेद शिखर की जीवंत वंदना की जाएगी।

    कार्यक्रम स्थल चित्रकूटधाम में 40 फीट लंबी और 12 फीट ऊंची सम्मेद शिखर की विशाल झांकी तैयार की जाएगी। इस अवसर पर 23 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा 23 निर्वाण लड्डू चढ़ाए जाएंगे।

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