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    नागपंचमी पर रायसेन में ‘नागों की अदालत’, आस्था के बीच न्याय की अनोखी परंपरा

    रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सीहोरा खुर्द गांव में नागपंचमी के अवसर पर एक अनोखा आयोजन देखने को मिला। सिद्ध क्षेत्र श्रीराम रसियाधाम में प्रतिवर्ष की भांति इस साल भी 'नागों की अदालत' सजाई गई, जहां न तो कोई कानूनी वकील होता है और न ही कोई न्यायाधीश। यहां शेषनाग के चबूतरे के समक्ष सत्य और असत्य का न्याय होने का दावा किया जाता है। आधुनिक दौर में इस आयोजन को लोग अपनी आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं।

    सर्पदंश से पीड़ित लोगों की लगती है ‘पेशी’

    गैरतगंज तहसील के सीहोरा खुर्द में आयोजित इस दरबार में दूर-दराज से ऐसे दर्जनों लोग पहुंचे, जो अतीत में सर्पदंश का शिकार हो चुके थे। पंडाजी अजब सिंह की उपस्थिति में यह दावा किया गया कि पीड़ितों के शरीर में नागों की आत्मा ने प्रवेश कर काटने की वजह बताई। इस दौरान यह भी कहा गया कि नाग की आत्मा ने भविष्य में किसी को क्षति न पहुंचाने का वचन दिया। पीड़ितों के परिजनों ने बताया कि पूर्व में यहां से 'गांसी' (धागा) बंधवाने के बाद उन्हें राहत मिली थी, जिसके कारण वे नियम अनुसार नागपंचमी पर यहां दर्शन हेतु आते हैं।

    मुसलाधार बारिश के बीच उमड़ी भारी भीड़

    क्षेत्र में हो रही तेज बारिश के बावजूद इस पारंपरिक आयोजन को देखने और हिस्सा लेने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। रायसेन जिले के सिलवानी, बरेली, उदयपुरा, सुल्तानपुर, औबेदुल्लागंज और बेगमगंज के अलावा भोपाल, सीहोर तथा सागर जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग सीहोरा खुर्द पहुंचे।

    वैज्ञानिक प्रगति और जनआस्था के बीच बहस

    एक तरफ जहां चिकित्सा विज्ञान ने अप्रत्याशित प्रगति की है और गंभीर से गंभीर बीमारियों व सर्पदंश के लिए आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं, वहीं दूसरी तरफ वर्षों से चले आ रहे इस प्रकार के आयोजनों में लोगों का भारी जमावड़ा आस्था और अंधविश्वास के बीच की बहस को पुनः रेखांकित करता है। वैज्ञानिक युग में भी इस स्थान के प्रति लोगों का गहरा विश्वास निरंतर बना हुआ है।

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