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    मोक्ष सप्तमी पर आज भीलवाड़ा में पहली बार निकलेगी भव्य मंगल रथयात्रा, गूंजेंगे भगवान पार्श्वनाथ के जयकारे

    क्रोध छोड़कर वर्तमान को सुधारें, कलह रहित घर में सुख-समृद्धि का वास होता है—आचार्य पुलकसागर

    भीलवाड़ा। मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर आज भीलवाड़ा में पहली बार भगवान पार्श्वनाथ की भव्य मंगल रथयात्रा निकाली जाएगी। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित होने वाली इस रथयात्रा को लेकर सकल दिगम्बर जैन समाज में खासा उत्साह है। रथयात्रा में जैन समाज के साथ सर्व समाज के लोग भी शामिल होंगे। शहर की सड़कों पर हाथियों, विशेष झांकियों, ध्वज, डोली, ढोल-मंजीरों और भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से भक्ति का माहौल बनेगा।

    इससे पहले मंगलवार को चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में आचार्य पुलकसागर महाराज ने जीवन में क्रोध के प्रभाव और उससे होने वाले नुकसान पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि जीवन को सुखी बनाना है तो आवेश में आकर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। आवेश में लिए गए निर्णय अक्सर दुखदायी होते हैं।

    क्रोध का जवाब तुरंत नहीं देना चाहिए

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि क्रोध में अच्छे शब्दों की हत्या हो जाती है। जीवन में एक नियम बना लेना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में गुस्से का जवाब तुरंत नहीं देना है। क्रोध तात्कालिक पागलपन है। उसे थोड़ा समय दे दिया जाए तो उसका प्रभाव अपने आप कम होने लगता है।

    उन्होंने कहा कि जीवन में हर प्राणी को क्रोध आता है। पहले संयुक्त परिवारों में यदि किसी एक व्यक्ति को गुस्सा आता था तो परिवार का दूसरा सदस्य उसे समझाकर संभाल लेता था, लेकिन आज छोटे परिवारों में गुस्से के समय समझाने और संभालने वाला कोई नहीं मिलता।

    आचार्यश्री ने कहा कि बच्चे कुछ ही पल में झगड़ा भूल जाते हैं, जबकि बड़े एक बार विवाद होने के बाद कई बार जिंदगी भर एक-दूसरे से बात नहीं करते। उन्होंने कहा कि कितना अच्छा हो यदि इंसान जीवनभर बच्चे की तरह मन को साफ रखे। जिंदगी एडजस्टमेंट का नाम है और जो परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बैठाना सीख लेता है, उसका जीवन खुशियों से भर जाता है।

    कलह रहित घर में लक्ष्मी का वास

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिस घर में गुरु की पूजा होती है, आपसी कलह नहीं होती और वाणी में सभ्यता व समझदारी होती है, वहां सदा लक्ष्मी का वास होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्मी का अर्थ केवल नोटों की गड्डियां नहीं, बल्कि घर का सुख, शांति और चैन भी है।

    उन्होंने कहा कि ऐसे घर से लक्ष्मी कभी लौटकर नहीं जाती। परिवार में प्रेम, सम्मान, संयम और मधुर वाणी का वातावरण ही वास्तविक समृद्धि है।

    क्रोध का परिवार तोड़ दिया तो परिवार खुशहाल

    आचार्यश्री ने कहा कि क्रोध कभी अकेले नहीं आता, बल्कि अपने पूरे परिवार के साथ आता है। यदि क्रोध के इस परिवार को ही तोड़ दिया जाए तो हमारा अपना परिवार खुशहाल हो जाएगा।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि क्रोध की मां अपेक्षा, पिता घमंड, पत्नी हिंसा और जुड़वा बच्चे बैर व विरोध हैं, जबकि जिद उसकी बहन है। ये सभी मिलकर परिवार को बर्बाद कर सकते हैं। इसलिए इससे पहले कि क्रोध का परिवार हमारे परिवार को बिखेरे, हमें ही क्रोध का परिवार बिखेर देना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि घरों में अधिकांश झगड़े या तो बीते हुए समय को लेकर होते हैं या भविष्य की चिंताओं को लेकर। वर्तमान को लेकर झगड़े बहुत कम होते हैं। भविष्य हमारे हाथ में नहीं है और भूतकाल वापस नहीं आ सकता। ऐसे में जो व्यक्ति वर्तमान को सुधार लेता है, वही वास्तविक अर्थों में आगे बढ़ता है।

    आचार्यश्री ने कहा कि भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंता और अतीत को लेकर अत्यधिक चिंतन छोड़ देना चाहिए। सहनशीलता से बड़ी समता दुनिया में कोई नहीं है। इसे अपना लिया जाए तो जीते-जी घर स्वर्ग बन सकता है।

    मोक्ष सप्तमी पर आज निकलेगी ऐतिहासिक मंगल रथयात्रा

    ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत बुधवार को भीलवाड़ा में भक्ति का नया इतिहास रचने की तैयारी है। श्री पार्श्वनाथ भगवान मोक्ष कल्याण महोत्सव दिवस मोक्ष सप्तमी पर पहली बार भव्य मंगल रथयात्रा निकाली जाएगी।

    चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि सकल दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में रथयात्रा सुबह 7:30 बजे सूर्यमहल से रवाना होगी।

    शास्त्रीनगर स्थित श्री पार्श्वनाथ मंदिर से श्रीजी भगवान को रथ में विराजमान कर सूर्यमहल लाया जाएगा। इसके बाद मंगल रथयात्रा प्रारंभ होगी।

    10 हाथी, सात झांकियां और सम्मेद शिखर की भव्य झांकी

    रथयात्रा में उत्तर प्रदेश के बड़ौत से आए पांच एरावत हाथियों के साथ श्रीजी के रथ के आगे कुल 10 हाथी चलेंगे। यात्रा में सात विशेष झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

    रथयात्रा में सबसे आगे सौधर्म इंद्र एवं इंद्राणी बग्गियों में सवार होकर चलेंगे। श्राविकाएं हाथों में ध्वज, डोली, ढोल और मंजीरे लेकर शामिल होंगी। भीलवाड़ा के विभिन्न महिला मंडलों एवं श्रावकों द्वारा सम्मेद शिखर की जीवंत वंदना प्रस्तुत की जाएगी।

    मंगल रथयात्रा बड़ला चौराहा, राजीव गांधी सर्किल और नेताजी सुभाष मार्केट होते हुए चित्रकूटधाम पहुंचेगी। यहां 40 फीट लंबी और 12 फीट ऊंची सम्मेद शिखर की विशाल झांकी बनाई गई है।

    इस अवसर पर 23 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भगवान पार्श्वनाथ को 23 निर्वाण लड्डू अर्पित किए जाएंगे।

    ज्ञान गंगा महोत्सव में उमड़ रहा सर्व समाज

    चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में आचार्य पुलकसागर महाराज की प्रवचन वाणी सुनने के लिए भीलवाड़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

    प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य सुशील कुमार एवं सुनील-लोकेन्द्र जैन परिवार ने प्राप्त किया। अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया।

    श्री पद्म प्रभु महिला मंडल, बापूनगर की सदस्यों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।

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