नई दिल्ली: देश में आगामी त्योहारों के दौरान मिठास बनी रहे और चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। पिछले एक महीने में देश के कई बाजारों में चीनी की खुदरा कीमतें 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो (जबकि रायपुर थोक बाजार में 70 रुपये/किलो तक) पहुंचने के बाद सरकार ने जमाखोरी रोकने और आपूर्ति सुधारने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
कीमतों में उछाल और उत्पादन में गिरावट मौजूदा सत्र में चीनी का उत्पादन अनुमानित 343 लाख टन से घटकर लगभग 306 लाख टन रहने का आकलन है। गन्ने की फसल में रेड रॉट (लाल सड़न) और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ अत्यधिक बारिश से हुआ जलभराव इसकी मुख्य वजह बना। हालांकि, सरकार का दावा है कि नए पेराई सत्र के शुरू होने तक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
एथेनॉल नहीं, मौसम और वैश्विक कमी जिम्मेदार सरकार ने स्पष्ट किया कि कीमतों में वृद्धि के लिए एथेनॉल उत्पादन जिम्मेदार नहीं है। एथेनॉल में चीनी का इस्तेमाल 12% से घटकर 9% रह गया है, जबकि इसका तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज और मक्के से बन रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मौसम की मार के कारण 2026-27 में 33 लाख टन चीनी की वैश्विक कमी का अनुमान है, जिससे वैश्विक कीमतें दो महीने में 16% तक बढ़ गई हैं।
राहत और नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम:
स्टॉक सीमा लागू: जमाखोरी रोकने के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय की गई है। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए भी 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक रखने पर रोक रहेगी।
शुल्क-मुक्त आयात: घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) आयात की अनुमति दी है।
अग्रिम पेराई सत्र: चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से ही पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है, जिससे अक्टूबर में ही 10 लाख टन से अधिक चीनी बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है।
किसानों को समय पर भुगतान अधिक चीनी को एथेनॉल की ओर मोड़ने से मिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 पेराई सत्र के गन्ना किसानों का करीब 97% बकाया भुगतान पूरा किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि वह उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए बाजार पर लगातार निगरानी रख रही है।

