More
    Homeधर्म-समाजयही है कंस की वो जेल, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने लिया था...

    यही है कंस की वो जेल, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने लिया था जन्म, आज भी मौजूद हैं प्राचीन निशान

    भगवान श्री कृष्ण के मामा कंस की जेल मथुरा के पोतरा कुंड के समय बनी हुई है. द्वापर युग की यह जेल आज भी भगवान कृष्ण के जन्म की याद दिलाती है. आज भी इस जेल में भगवान श्री कृष्ण के जन्म के साथ से मौजूद हैं और वासुदेव और देव की इस मंदिर में विराजमान हैं और योग माया का यह प्राचीन स्थान आज भी मल्लपुरा में कंस कारागार के नाम से जाना जाता है.

    भगवान कृष्ण के जन्म की दिलाती है याद
    राजा कंस के अत्याचारों से मथुरावासी हाहाकार करने लगे. कंस के अत्याचार देख लोगों की पुकार सुनकर भादों के महीने में आधी रात बारह बजे चक्रधारी विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने कंस की कारागार में माता देवकी के गर्व से जन्म लिया. रात के अंधेरे में कारागार के सभी सुरक्षा कर्मी गहरी नींद में सो गए. जेल के ताले अपने आप ही खुल गए और वासुदेव की हाथों की हथकड़ी भी खुल गई, जिसके बाद कृष्ण को वासुदेव यमुना के मार्ग से गोकुल पहुंचे.
    आज हम आपको उसी कंस के कारागार के बारे में बताएंगे, जहां के बारे पुजारियों का दावा है कि ये वहीं प्राचीन हजारों वर्ष पुराना कारागार है, जहां कंस ने बहन देवकी और अपने जीजा वासुदेव को बंदी बनाकर रखा था, जिसे कृष्ण का प्राचीन जन्मस्थान बताया जाता है.

    बृजवासियों को कराया मुक्त
    मथुरा नगरी के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को कैद करके रखा था, जहां पर भगवान श्री कृष्ण ने राजा कंस के पापों से बृजवासियों को मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था. आज भी मंदिर में माता देवकी वासुदेव जी के साथ श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित है. हर तरफ श्री कृष्ण के जन्म स्थान होने के बारे में लिखा है.

    वहीं कुछ प्राचीन साक्ष्य भी यहां मौजूद हैं, जिसके बारे में लोकल 18 से बात करते हुए पुजारी पंडित हरी गोस्वामी ने बताया कि ये वही प्राचीन कृष्ण जन्मस्थान है, जिसके बारे में कई पुराणों में भी लिखा है. मगर लोग उस जन्मभूमि को हाईलाइट होने के कारण ज्यादा जानते हैं.
    विग्रह को ले जाकर किया स्थापित
    कंस कारागार के पुजारी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म इसी कारागार में हुआ था. कृष्ण के कारागार में जन्म होने के बाद उनके विग्रह को ले जाकर दूसरी जगह स्थापित कर दिया. वर्तमान में आज उसी को सब लोग कृष्ण की जन्मसली ही मानते हैं, जो कृष्ण जन्मभूमि में नहीं है. हालांकि ये और वो भी प्राचीन केशव देव के हैं. मगर यहां का महत्व अधिक है और इसी के पास वो पोतरा कुंड भी बना है. कृष्ण के जन्म के बाद माता देवकी के गंदे वस्त्र यानी लोथरा-पोथरा धोए गए थे, इसी लिए उसे पोथरा कुंड कहते हैं और यहां के बारे में 500 सालों का इतिहास है. यहां ये रिवाज है कि उनके बसंजो के अलावा कोई और सेवा में नहीं रह सकता है.

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here