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    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मासि​क कालाष्टमी के साथ 5 और भी व्रत-पर्व, लक्ष्मी पूजा का बना शुभ संयोग, संतान, धन, संपत्ति प्राप्ति का अवसर

    इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर शुक्रवार को है. उस दिन व्रत रखकर रात्रि के समय में जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा. जन्माष्टमी के दिन मासिक कालाष्टमी के साथ 5 और भी व्रत और पर्व हैं. जन्माष्टमी के अवसर पर लक्ष्मी पूजा का भी सुंदर संयोग बना है. इस दिन व्रत और पूजा से आपके धन-संपत्ति में वृद्धि होगी, वहीं जन्माष्टमी व्रत से संतान प्राप्ति का एक अच्छा अवसर है. जिन दंपत्तियों की कोई संतान नहीं है, वे इस अवसर का लाभ ले सकते हैं.

    जन्माष्टमी पर और भी 5 व्रत

    जन्माष्टमी के दिन आद्याकाली जयंती, विन्ध्यवासिनी जयंती, अगस्त्य अर्घ्य, मासिक कालाष्टमी और शुक्रवार व्रत है.
    जन्माष्टमी व्रत: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी व्रत रखते हैं. इस साल 4 सितंबर को 2:25 एएम से भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि शुरू है और यह 5 सितंबर को 12:13 एएम तक मानी जाएगी. उदयातिथि के आधार पर जन्माष्टमी व्रत 4 सितंबर को रखा जाएगा. 4 सितंबर को मध्य रात्रि के समय में बाल गोपाल का जन्म होगा, उस समय उत्सव माना जाएगा.

    मासिक कालाष्टमी: मासिक कालाष्टमी का व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी ​तिथि को रखते हैं. ऐसे में भाद्रपद की मासिक कालाष्टमी जन्माष्टमी के दिन ही होगी. इसमें काल भैरव की पूजा करते हैं. पूजा का मुहूर्त निशिता काल में होता है. निशिता मुहूर्त रात में 11:57 पी एम से 5 सितंबर को 12:43 ए एम तक रहेगा. इसमें मंत्र जाप, पूजा पाठ आदि करने से रोग, दोष, कष्ट आदि दूर होते हैं, अकाल मृत्यु का भय नाश होता है, तंत्र-मंत्र की नकरात्मकता भी मिट जाती है.

    काली जयंती: 10 महाविद्यायों में देवी काली प्रथ​म महाविद्या हैं. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को काली जयंती मनाते हैं. देवी भागवत पुराण में कहा गया है कि देवी काली के सौम्य और उग्र स्वरूप ही 10 महाविद्या के रूप में पूजित हैं. माता काली रक्त और कृष्ण वर्ण की हैं. रक्त वर्ण वाली मां काली को सुंदरी और कृष्ण वर्ण वाली काली को दक्षिणा काली कहते हैं. इस देवी का रंग काजल के समान है, इसलिए उनका नाम काली पड़ा. इस बार जन्माष्टमी पर मां काली की जयंती मनाई जाएगी, उनकी भी पूजा निशिता मुहूर्त में की जाएगी.
    विन्ध्यवासिनी जयंती: जन्माष्टमी के दिन विन्ध्यवासिनी जयंती मनाते हैं. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को विन्ध्यवासिनी देवी की उत्पत्ति हुई थी. ये देवी हमेशा विन्ध्याचल पर्वत पर निवास करती हैं, इसलिए उनका नाम विन्ध्यवासिनी पड़ा. देवी विन्ध्यवासिनी आदि महाशक्ति हैं. द्वादश सिद्धिविद्या देवियों में उनका एक स्थान है, उसी रूप में उनकी पूजा करते हैं. जो इनकी पूजा करता है, उसके सभी प्रकार के रोग, कष्ट, शोक एवं संकट नष्ट हो जाते हैं.
    अगस्त्य अर्घ्य: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी यानि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अगस्त्य अर्घ्य देने की पंरपरा है. अगस्त्य ऋषि का वर्णन रामायण और महाभारत काल में मिलता है. 4 सितंबर को अगस्त्य अर्घ्य देने का समय प्रात:काल 04 बजकर 58 मिनट से सुबह 06:00 ए एम तक है. उस दिन अर्घ्य के लिए आपको 1 घंटा 2 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. जो व्यक्ति अगस्त्य ऋषि को अर्घ्य देता है, उसे मृत्यु के बाद परब्रह्म की प्राप्ति होती है.शुक्रवार लक्ष्मी पूजा: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को भगवान विष्णु का कृष्णावतार हुआ था, जो इस साल 4 सितंबर को है. उस दिन शुक्रवार व्रत और लक्ष्मी पूजा है. जन्माष्टमी के अवसर पर आप माता लक्ष्मी की पूजा करके अपने धन संपत्ति में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं. लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में करते हैं यानि सूर्यास्त के बाद. उस दिन सूर्यास्त शात को 06:39 पी एम पर होगा.

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