नई दिल्ली। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) क्रीमी लेयर के नियमों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं मिल सकी है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की स्पष्टीकरण अर्जी पर सुनवाई करते हुए अपने 11 मार्च के पुराने आदेश पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही पीठ ने सभी संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
सिर्फ वेतन से तय नहीं होगी क्रीमी लेयर: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अदालत ने अपने पूर्व फैसले को दोहराया। कोर्ट का स्पष्ट कहना था कि केवल माता-पिता की वेतन आय (Salary Income) को आधार बनाकर बच्चों को क्रीमी लेयर में डालकर आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। क्रीमी लेयर का आकलन करने के लिए माता-पिता के पद के स्तर (Category of Post), उनकी सामाजिक स्थिति और सेवा श्रेणी को देखना भी अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का सीधा प्रभाव सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), बैंकों और निजी क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के परिवारों पर पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष रखीं प्रशासनिक चुनौतियां
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इस फैसले को लागू करने में व्यापक व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। उन्होंने दलील दी कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC CSE 2025) की भर्ती प्रक्रिया के तहत 958 अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन (Service Allocation) का कार्य अंतिम चरण में है। यदि यह निर्णय पिछली तिथि से लागू किया जाता है, तो मेरिट सूची, आईएएस (IAS) व आईपीएस (IPS) कैडर आवंटन और प्रशिक्षण की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
देशभर की नियुक्तियों पर पड़ सकता है असर
अदालत में यह भी रेखांकित किया गया कि यह विषय केवल केंद्रीय सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भर्ती प्रक्रियाओं तथा उच्च शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले की व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।
17 सितंबर 2026 को होगी मामले की अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अन्य सभी पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद ही इस विषय पर आगे की सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 17 सितंबर 2026 तय की है, तब तक 11 मार्च का आदेश प्रभावी रहेगा।


