बिलासपुर: रेलवे बोर्ड द्वारा पेंशनभोगियों के हित में मैनुअल पास जारी करने की समय-सीमा बढ़ाए जाने के स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर उनका पालन नहीं किया जा रहा है। बिलासपुर रेल मंडल के कार्मिक विभाग (डीपीओ कार्यालय) द्वारा निर्देशों को दरकिनार किए जाने से पूर्व रेलकर्मी खासे परेशान हैं। पास बनवाने की उम्मीद में बुजुर्ग पेंशनभोगी अधिकारियों और पास सेक्शन के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटाया जा रहा है।
सांसद के हस्तक्षेप के बाद बोर्ड ने दी थी राहत
उल्लेखनीय है कि रेलवे ने बीते महीनों में ऑफलाइन पास प्रक्रिया को पूरी तरह बंद कर केवल डिजिटल पास जारी करने का फरमान जारी किया था। इसके विरोध में पूर्व रेलकर्मियों ने मोर्चा खोला था। इस गंभीर मुद्दे पर सांसद शशि थरूर ने भी रेल मंत्री को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था। तत्पश्चात रेलवे बोर्ड एवं प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी (प्रिंसिपल सीपीओ) की ओर से ऑफलाइन पास की अवधि छह माह बढ़ाने का औपचारिक परिपत्र जारी किया गया था।
पास बुक के स्टॉक का बहाना
उच्चस्तरीय निर्देशों के बाद भी बिलासपुर मंडल में स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। पूर्व कर्मचारियों का आरोप है कि जब वे डीपीओ दफ्तर के पास सेक्शन पहुँचते हैं, तो अधिकारी पास बुक का स्टॉक खत्म होने का मनगढ़ंत बहाना बनाकर उन्हें चलता कर देते हैं। अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए बार-बार दफ्तर आना-जाना शारीरिक और मानसिक रूप से पीड़ादायक साबित हो रहा है।
डिजिटल व्यवस्था बुजुर्गों के लिए बनी सिरदर्द
तकनीक से अनजान और स्मार्टफोन या कंप्यूटर चलाने में असमर्थ बुजुर्ग पेंशनधारियों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखकर ही बोर्ड ने मैनुअल पास की सुविधा बहाल रखी थी। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन का यह ढुलमुल रवैया रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहा है।
ईएफटी बुक की छपाई पर सवाल
आक्रोशित रिटायर्ड कर्मियों ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब ट्रेन चेकिंग स्टाफ के लिए ईएफटी (EFT) बुक्स की नियमित प्रिंटिंग और उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है, तो पूर्व कर्मचारियों की पास बुक के लिए कागजी अड़चनें क्यों पैदा की जा रही हैं? पूर्व रेलकर्मियों ने मांग की है कि बोर्ड के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन कराते हुए पास बुक का पर्याप्त स्टॉक तत्काल उपलब्ध कराया जाए ताकि बुजुर्गों को अनावश्यक परेशानी से मुक्ति मिल सके।


