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    265 लोग सुरंग में फंसे, चीनी अफसर ने छोड़ा साथ; रेस्क्यू में भारत कर रहा मदद

    काठमांडू। नेपाल के उत्तरी और मध्य इलाकों में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद अब भोटेकोशी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने फिर से बाढ़ का संकट पैदा कर दिया है। प्रभावित इलाकों से मलबे के बीच से शव मिलने का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे गुरुवार तक इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 तक पहुंच गई है। वहीं, 5,083 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत मजदूरों की संख्या सबसे अधिक है।

    चीनी अधिकारी पर 265 मजदूरों को सुरंग में छोड़कर भागने का गंभीर आरोप

    आपदा के बीच एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना में कार्यरत कर्मचारी राज छेत्री ने आरोप लगाया है कि उनके चीनी सुपरवाइजर ने आपदा के समय 265 स्थानीय कर्मचारियों को सुरंग के भीतर ही छोड़ दिया और खुद अपनी जान बचाकर मौके से फरार हो गया।

    छेत्री के अनुसार, जब सुरंग के अंदर एक जोरदार आवाज सुनाई दी, तो मजदूरों ने बाहर निकलने की इजाजत मांगी। हालांकि, सुपरवाइजर ने उन्हें बाहर आने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और स्वयं सुरक्षित स्थान की ओर निकल गया।

    भारतीय टनल रेस्क्यू टीम का नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान

    इस विषम परिस्थिति में भारत ने पड़ोसी देश नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। भारतीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर 'चिलिमे पावर हाउस' की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए रात-दिन जुटी हुई है।

    रेस्क्यू अपडेट: भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने स्याब्रूबेसी स्थित टनल रेस्क्यू टीम के बेस कैंप का दौरा किया। उन्होंने बताया कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों के दल बिना किसी भय के राहत कार्य में लगे हैं। विशेष उपकरणों की मदद से सुरंग के अंदर 100 मीटर तक का दायरा साफ कर जायजा ले लिया गया है और अब भारी मशीनों को अंदर ले जाने की तैयारी की जा रही है।

    तिब्बती पठार पर पिघलते हिमनद: चीन के जलवायु विशेषज्ञों की चेतावनी

    चीन के राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के उप निदेशक गाओ रोंग ने आगाह किया है कि तिब्बती पठार पर स्थित हिमनद (ग्लेशियर) तेजी से अस्थिर हो रहे हैं। इससे नेपाल-तिब्बत सीमा पर भविष्य में भी अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइड जैसी आपदाओं का खतरा बना रहेगा।

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