नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सीजेपी (CJP) कार्यकर्ता के परिजनों के साथ हुई मारपीट के मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस ने पहले से दर्ज प्राथमिकी (FIR) में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अतिरिक्त, एक नाबालिग को ऑनलाइन धमकियां देने और आपत्तिजनक सामग्री भेजने की शिकायत पर पुलिस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत पृथक मामला पंजीकृत किया है। दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया है।
घटनाक्रम और प्राथमिक प्राथमिकी
यह विवाद 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रारंभ हुआ था, जहां छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। इस संदर्भ में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत प्राथमिकी (संख्या 62/2026) दर्ज की गई थी।
पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और जातिगत पहचान को ध्यान में रखते हुए अब जांच में SC/ST एक्ट के कड़े प्रावधान भी शामिल कर दिए गए हैं।
पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत नई प्राथमिकी
मामले में नया मोड़ तब आया जब एक नाबालिग छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने दूसरी प्राथमिकी दर्ज की:
गंभीर आरोप: शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे इंटरनेट के माध्यम से निरंतर प्रताड़ित किया गया, आपत्तिजनक सामग्री भेजी गई और गंभीर धमकियां दी गईं।
सख्त धाराएं: इस नई प्राथमिकी में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के साथ-साथ BNS की धारा 351(3) (आपराधिक धमकी), धारा 78, 79 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67 शामिल की गई है।
विवाद का मुख्य कारण
आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर संजय कुमार पर प्राणघातक हमला किया गया था, जिसके बाद उन्हें उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। यह मामला तब पुनः तूल पकड़ गया जब सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो/पॉडकास्ट क्लिप वायरल हुआ, जिसमें वह कथित तौर पर घटना का जिक्र करते देखे गए। हालांकि, आरोपी भारद्वाज ने अपने बचाव में कहा है कि उन्होंने केवल आत्मरक्षा (सेल्फ-डिफेंस) में प्रतिक्रिया दी थी। फिलहाल पुलिस हिरासत में लेकर मामले की गहन जांच कर रही है।


