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    बिहार पंचायत चुनाव के बाद सुरक्षा पर सवाल: मुखिया-सरपंचों को बंदूक का लाइसेंस देने पर नीतीश सरकार का विचार

    बिहार में अगले कुछ महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. हालांकि चुनाव से पहले राज्य में हो रही फायरिंग और सुरक्षा को लेकर नीतीश कुमार सरकार खासी चिंतित है. सरकार ने इसके लिए एक अहम कदम उठाया और राज्यभर में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शस्त्र लाइसेंस जारी करने का फैसला किया है.

    सरकार की ओर से यह फैसला पंचायत प्रतिनिधियों, खासतौर पर मुखियाओं (पंचायत प्रमुख) पर ताबड़तोड़ हुए कई हिंसक हमलों के बाद लिया गया है. राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्वाचित पंचायत सदस्यों के शस्त्र लाइसेंस आवेदनों पर कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है.

    बिना देरी के पूरी हो सत्यापन प्रक्रिया

    हालांकि, निर्देश में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि शस्त्र लाइसेंस आवेदनों के सत्यापन के लिए स्थापित नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. सरकार ने अपने आदेश में कहा कि सत्यापन प्रक्रिया (verification process) को बिना किसी अनावश्यक देरी के तुरंत पूरा किया जाना चाहिए.

    पंचायती राज विभाग द्वारा शुरू किए गए इस प्रस्ताव को मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल गई. बैठक के दौरान सीएम नीतीश ने अधिकारियों को लाइसेंस प्रक्रिया में तेजी लाने और पंचायत प्रतिनिधियों के आवेदनों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया.

    हाल के दिनों फायरिंग की घटनाएं बढ़ीं

    सरकार की ओर से यह कदम हाल के दिनों में कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं के मद्देनजर उठाया गया है. पिछले हफ्ते ही लखीसराय जिले में एक मुखिया और उसके सहयोगी की एक समारोह से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इससे पहले फरवरी में गया जिले के चिरैला पंचायत के उप मुखिया और जेडीयू के ब्लॉक सचिव महेश मिश्रा की हत्या कर दी गई थी.

    इसी तरह हत्या की कोशिश और धमकियों की ढेरों घटनाएं कई अन्य जिलों समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण, भोजपुर, जमुई और नवादा में भी सामने आई हैं. लगातार हमलों और खराब होती सुरक्षा को लेकर चिंतित पंचायत प्रतिनिधियों ने पहले राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर सुरक्षा की मांग की थी.

    चुनाव से पहले लुभाने की कवायद

    यह उपाय इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय प्रतिनिधियों का समर्थन पाने के मकसद से राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों में से एक है. इससे पहले पंचायत सदस्यों के भत्ते बढ़ा दिए गए थे.

    एक अन्य अहम फैसले में, बिहार सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाली महिलाओं की शादी के लिए हर पंचायत में मैरिज हॉल बनाने को लेकर अपनी मंजूरी दे दी है. इस योजना के लिए 4,026 करोड़ रुपये का बजट मंजूर भी किया गया है, इसे स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों ‘जीविका दीदियों’ के जरिए लागू किया जाएगा.

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