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    अलवर निकाय चुनाव: करोड़पति प्रत्याशी, लेकिन पढ़ाई में पीछे

    39 करोड़ की संपत्ति वाली कांग्रेस प्रत्याशी केवल साक्षर, भाजपा की प्रतिद्वंद्वी ग्रेजुएट

    अलवर। नगर निगम चुनाव में इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की जीत-हार तक सीमित नहीं है। नामांकन के साथ जमा कराए गए शपथ पत्रों से प्रत्याशियों की शैक्षणिक योग्यता और संपत्ति की तस्वीर भी सामने आई है। अलवर नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस ने सभी वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं। यानी दोनों प्रमुख दलों के कुल 130 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनकी शैक्षणिक योग्यता का विश्लेषण करने पर सामने आता है कि दोनों दलों में साक्षर से लेकर मास्टर और पेशेवर डिग्रीधारी प्रत्याशी मैदान में हैं।

    दिलचस्प स्थिति यह है कि सबसे अधिक संपत्ति रखने वाली प्रत्याशियों में शामिल कांग्रेस की एक महिला प्रत्याशी शैक्षणिक योग्यता के मामले में सबसे निचले पायदान पर हैं। वार्ड 34 से कांग्रेस प्रत्याशी ममता सैनी के पास करीब 39 करोड़ रुपए की संपत्ति बताई गई है, लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता केवल साक्षर है। वहीं इसी वार्ड से उनके सामने भाजपा की प्रत्याशी पूजा ग्रेजुएट हैं। इससे यह चुनावी सवाल भी सामने आता है कि निकाय चुनाव में मतदाता प्रत्याशी की राजनीतिक और सामाजिक पकड़ के साथ उसकी शिक्षा और आर्थिक स्थिति को कितना महत्व देते हैं।

    करोड़ों की संपत्ति, दोनों प्रत्याशी ग्रेजुएट

    वार्ड 36 भी इस चुनाव में खास चर्चा में है। यहां मुकाबला करने वाली दोनों महिला प्रत्याशी करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। हालांकि शैक्षणिक योग्यता के मामले में दोनों ही ग्रेजुएट हैं। ऐसे में इस वार्ड में मतदाताओं के सामने आर्थिक रूप से मजबूत और उच्च शिक्षा प्राप्त दोनों प्रत्याशियों में से चुनाव करने की स्थिति है।वहीं वार्ड 7 को भी चुनावी दृष्टि से हॉट वार्ड माना जा रहा है। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी ग्रेजुएट हैं। वार्ड 37 में भी दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी ग्रेजुएट हैं।

    चार वार्ड ऐसे, जहां दोनों प्रत्याशी केवल साक्षर

    शैक्षणिक योग्यता के लिहाज से नगर निगम के कुछ वार्ड बेहद अलग तस्वीर पेश करते हैं। वार्ड 4, 10 और 15 में कांग्रेस और भाजपा दोनों के प्रत्याशी केवल साक्षर हैं। इनके अलावा वार्ड 55 में भी दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी केवल साक्षर हैं। इसका मतलब यह है कि इन वार्डों में चुनावी मुकाबला शिक्षा की योग्यता के बजाय राजनीतिक संगठन, व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय मुद्दों, जातीय-सामाजिक समीकरण और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ के आधार पर ज्यादा प्रभावित हो सकता है।

    चुनाव में असली सवाल—शिक्षा, संपत्ति या राजनीतिक पकड़?

    अलवर नगर निगम चुनाव के आंकड़े यह दिलचस्प तस्वीर सामने रखते हैं कि शैक्षणिक योग्यता और आर्थिक संपन्नता का सीधा संबंध प्रत्याशी की चुनावी स्थिति से नहीं है। करीब 39 करोड़ रुपए की संपत्ति वाली प्रत्याशी केवल साक्षर हैं, जबकि उनके सामने ग्रेजुएट प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 9 सितंबर को मतदान के दौरान मतदाता प्रत्याशी की शिक्षा, संपत्ति, राजनीतिक परिवार, सामाजिक पकड़, व्यक्तिगत छवि और स्थानीय मुद्दों में से किसे सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। 14 सितंबर को आने वाला परिणाम न केवल राजनीतिक दलों की ताकत बताएगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि अलवर के मतदाताओं ने पार्षद चुनते समय किस कसौटी को सबसे ज्यादा महत्व दिया।

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