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    गरबा विवाद में अमृता फडणवीस की एंट्री, बोलीं- त्योहार सभी को साथ लेकर चलते हैं

    मुंबई: महाराष्ट्र में आगामी नवरात्रि पर्व के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और दांडिया कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बयानबाजी तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की अपील और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता व मंत्री नितेश राणे द्वारा इसका समर्थन किए जाने के बाद, अब राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई अन्य समुदाय का व्यक्ति सांस्कृतिक मर्यादा में रहकर गरबा उत्सव का आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कोई आपत्ति नजर नहीं आती।

    मंत्री नितेश राणे की मांग: पहचान पत्र की जांच और हनुमान चालीसा का पाठ

    महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने वीएचपी की अपील का पुरजोर समर्थन करते हुए दावा किया था कि ऐसे आयोजनों के आड़ में 'लव जिहाद' जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि जो लोग मूर्ति पूजा और हिंदू मान्यताओं में आस्था नहीं रखते, उन्हें इन धार्मिक आयोजनों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने आयोजकों को सलाह दी कि पंडालों में प्रवेश से पूर्व आगंतुकों के पहचान पत्र जांचे जाएं और हनुमान चालीसा का पाठ कराया जाए।

    विश्व हिंदू परिषद की गाइडलाइन: आधार कार्ड जांचने और तिलक लगाने के निर्देश

    विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने आगामी 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे नवरात्रि उत्सव को लेकर आयोजकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वीएचपी ने स्पष्ट कहा है कि गरबा और दांडिया पांडालों में मुस्लिम समुदाय के लोगों को प्रवेश न दिया जाए। संगठन ने सुरक्षा व व्यवस्था के लिहाज से प्रवेश द्वार पर आधार कार्ड की जांच करने और प्रतिभागियों के माथे पर तिलक लगाने का सुझाव दिया है।

    अमृता फडणवीस और नितेश राणे के विचारों में विरोधाभास

    इस पूरे घटनाक्रम में सत्ताधारी खेमे से जुड़े दो प्रमुख चेहरों के विचार एक-दूसरे के विपरीत नजर आ रहे हैं। जहां नितेश राणे कड़े प्रतिबंधों और पहचान जांच की वकालत कर रहे हैं, वहीं अमृता फडणवीस ने त्योहारों को सामाजिक सौहार्द और समावेशी भावना का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि उत्सव में शामिल होकर खुशियां बांटने में कोई बुराई नहीं है, बशर्ते आयोजन की गरिमा बनी रहे।

    आयोजनों में पहचान जांच को लेकर बहस तेज

    दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर लगातार जताई जा रही चिंताओं के बीच यह मुद्दा गरमा गया है। नितेश राणे और वीएचपी जहां सुरक्षा व धार्मिक आस्था की रक्षा के नाम पर सख्त चेकिंग की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ त्योहारों की सर्वसमावेशी परंपरा को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं।

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