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    अलवर में पार्क निर्माण के दौरान 20 साल पुराने हरे पेड़ पर चली जेसीबी, पर्यावरण संरक्षण पर उठे सवाल

    निर्माण कार्य में गिरा पेड़, स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी; अधिकारियों से पुराने पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग

    अलवर। सरकार और प्रशासन की ओर से पर्यावरण संरक्षण तथा पौधरोपण को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन अलवर शहर में पार्क निर्माण के दौरान करीब 20 साल पुराने हरे-भरे पेड़ के गिरने का मामला सामने आया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में पेड़ों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।

    मामला अरावली विहार थाना क्षेत्र में दक्ष हॉस्पिटल के पीछे स्थित स्कीम नंबर 8 एक्सटेंशन का है। यहां यूआईटी की ओर से पार्क निर्माण का काम कराया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान मौके पर मौजूद करीब 20 साल पुराना हरा पेड़ जेसीबी की चपेट में आ गया और गिर गया।

    जेसीबी की चपेट में आया पुराना हरा पेड़

    स्थानीय लोगों के अनुसार पार्क निर्माण स्थल पर पहले से मौजूद पेड़ को निर्माण कार्य के दौरान बचाने के लिए पर्याप्त सावधानी बरती जानी चाहिए थी। खुदाई के दौरान जेसीबी की चपेट में आने से पेड़ गिर गया।

    घटना की जानकारी सामने आने के बाद आसपास के लोगों में नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय निवासी राजकुमार और कन्हैयालाल सैनी ने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए थी, ताकि पुराने और हरे पेड़ों को नुकसान से बचाया जा सके।

    पर्यावरण संरक्षण के दावों पर स्थानीय लोगों का सवाल

    स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार और प्रशासन पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और पेड़ों को बचाने के लिए अभियान चलाते हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य के दौरान वर्षों पुराने हरे पेड़ का गिर जाना चिंता का विषय है।

    लोगों का सवाल है कि जब पेड़ निर्माण स्थल पर पहले से मौजूद था तो पार्क की योजना तैयार करते समय उसकी सुरक्षा को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया। उनका कहना है कि निर्माण कार्य की रूपरेखा बनाते समय पुराने पेड़ों को बचाने के विकल्प तलाशे जाने चाहिए थे।

    बाद में पेड़ को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कार्रवाई

    स्थानीय लोगों के मुताबिक पेड़ गिरने के बाद अधिकारियों की ओर से उसे दूसरी जगह शिफ्ट करने की कार्रवाई की गई। हालांकि, लोगों का कहना है कि यदि निर्माण शुरू होने से पहले ही पेड़ की स्थिति और उसकी सुरक्षा को लेकर योजना बनाई जाती तो उसे गिरने से बचाया जा सकता था।

    स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि भविष्य में पार्क, सड़क और अन्य विकास कार्यों के दौरान मौके पर मौजूद पुराने पेड़ों की पहचान कर उनकी सुरक्षा के लिए पहले से व्यवस्था की जाए।

    निर्माण और पर्यावरण के बीच संतुलन की मांग

    लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इनके साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। खासतौर पर वर्षों पुराने हरे पेड़ों को बचाने के लिए निर्माण की दिशा और तकनीक में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

    स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि पार्क निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाए और पुराने पेड़ों को बचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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