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    उज्जैन के गणेश मंदिर में उल्टा स्वास्तिक बनाने का राज, मन्नत पूरी होने से जुड़ी है खास मान्यता

    उज्जैन| गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर देश भर में गणपति बप्पा की स्थापना की जा रही है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश की पवित्र धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित भगवान गणेश का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि इस मंदिर में भक्त अपनी मनोकामनाओं की अर्जी लगाते हैं और विघ्नहर्ता उनकी समस्त चिंताओं का निवारण कर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।

    चिंतामन गणेश हरते हैं श्रद्धालुओं के समस्त कष्ट

    उज्जैन में स्थापित भगवान चिंतामन गणेश को भक्त चिंताओं का नाश करने वाले 'चिंताहरण' के रूप में पूजते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु मंदिर के पिछले भाग में उल्टा स्वास्तिक बनाकर बप्पा के समक्ष अपनी प्रार्थना रखते हैं। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु भगवान चिंतामन की पीठ की ओर उल्टा स्वास्तिक बनाकर मन्नत मांगते हैं।

    जब भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है, तब वे पुनः मंदिर आकर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, कई श्रद्धालु परिसर में मन्नत का रक्षा सूत्र बांधते हैं और इच्छा पूरी होने के उपरांत उसे खोलने वापस आते हैं।

    तुलादान और प्रसाद वितरण की परंपरा

    मंदिर परिसर में एक वृहद तराजू स्थापित है, जिसका प्रयोग श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर तुलादान हेतु करते हैं। भक्त अनाज, मिष्ठान एवं अन्य सामग्री से स्वयं का या स्वजनों का तुलादान करते हैं। विशेष रूप से संतान प्राप्ति की मन्नत पूर्ण होने पर अनेक परिवार शिशु के भार के बराबर लड्डुओं का तुलादान करते हैं और उसे श्रद्धालुओं में वितरित कर देते हैं।

    वनवास काल में प्रभु श्रीराम ने की थी स्थापना

    पौराणिक गाथाओं के अनुसार, वनवास काल के दौरान भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी इस क्षेत्र से होकर गुजरे थे। उन्होंने यहां स्थित एक वटवृक्ष के नीचे विश्राम किया था। माना जाता है कि इसी स्थान पर माता सीता ने भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की थी और तीनों ने मिलकर गणपति जी का प्रथम पूजन संपन्न किया था।

    कष्टों से मुक्ति पाने उमड़ता है जनसैलाब

    इसी अगाध आस्था के कारण प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु चिंतामण गणेश मंदिर में माथा टेकने पहुंचते हैं। भक्त भगवान के दर्शन कर अपने जीवन की समस्त कठिनाइयों को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

    एक ही प्रतिमा में समाहित हैं गणेश जी के तीन स्वरूप

    चिंतामण गणेश मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यहां एक ही स्थान पर भगवान गणेश के तीन पावन स्वरूपों के दर्शन होते हैं। श्रद्धालु चिंतामण गणेश को चिंताओं का हरण करने वाला, इच्छामन गणेश को सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला और सिद्धिविनायक गणेश को कार्य सिद्धि प्रदान करने वाला मानकर पूजन करते हैं।

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