आजमगढ़। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) द्वारा आतंकी संगठन अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टीनेंट (AQIS) की विचारधारा का प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद नबील को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसियां अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि करीब एक साल पहले उसका देवबंद जाने का मुख्य उद्देश्य क्या था।
एकांत में रहना और संदिग्ध गतिविधियां
दीदारगंज थाना क्षेत्र के चितारा महमूदपुर गांव का रहने वाला 19 वर्षीय नबील लोगों से बहुत कम मेलजोल रखता था। वह अपने घर की ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में अकेले रहता था। पड़ोसियों के मुताबिक, उसकी सामान्य दिनचर्या से किसी को भी उसकी किसी बड़ी आपराधिक या देशविरोधी गतिविधि का अंदेशा नहीं हुआ। हालांकि, एटीएस अब उसकी डिजिटल गतिविधियों, संपर्कों और अन्य संदिग्ध लोगों से संबंधों की बारीकी से जांच कर रही है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और धार्मिक शिक्षा
नबील के पिता दानिश वर्तमान में सऊदी अरब में रहकर नौकरी करते हैं, जबकि उसकी मां अपनी दोनों बेटियों के साथ फूलपुर स्थित मायके में रहती हैं और कभी-कभार ही गांव आती थीं। नबील गांव में अपने दादा-दादी के साथ रहता था। ग्रामीणों के अनुसार, उसने अपनी शुरुआती धार्मिक शिक्षा फूलपुर के बाबू मदरसे से प्राप्त की थी और करीब तीन साल पहले हिफ्ज का कोर्स पूरा किया था। इसके बाद वह सरायमीर स्थित मदरसा मदरतुल इस्लाम में आगे की पढ़ाई कर रहा था। पुलिस और जांच एजेंसियों की शुरुआती छानबीन में परिवार के किसी अन्य सदस्य की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि सामने नहीं आई है।
आजमगढ़ में ATS की दूसरी बड़ी कार्रवाई
जिले में पिछले साढ़े तीन महीनों के भीतर कट्टरपंथी और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एटीएस की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 31 मई को निजामाबाद थाना क्षेत्र के संजरपुर (खुदादादपुर) से मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया गया था, जो पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क के संपर्क में था और जिसे एक महिला राजनीतिक नेता की हत्या का टास्क दिया गया था। अब 12 सितंबर को नबील की गिरफ्तारी के बाद उसके पैतृक घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है, और सुरक्षा के मद्देनजर गांव में दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
एटीएस की जांच पूरी होने के बाद ही नबील के पूरे नेटवर्क और उसके संपर्कों की असली तस्वीर साफ हो सकेगी।


