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    मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव, चार लोगों की हत्या के बाद कुकी-जो काउंसिल ने जताई चिंता

    इंफाल। मणिपुर में सुरक्षा स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है। राज्य के तमेंगलोंग और नोनी जिलों के टोलन तथा लोंगपी गांवों में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा किए गए कायराना हमले में दो महिलाओं समेत चार निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई है। इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है।

    कुकी-जो काउंसिल की कड़ी निंदा और चेतावनी

    इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कुकी-जो काउंसिल ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। परिषद ने बयान जारी कर कहा है कि सशस्त्र समूहों की इस तरह की लगातार हिंसक गतिविधियां आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गई हैं। परिषद ने गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इन गतिविधियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो मणिपुर एक बार फिर से पूर्ण संघर्ष के मुहाने पर पहुंच सकता है।

    2026 में अब तक 22 से अधिक मौतें होने का दावा

    कुकी-जो काउंसिल ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक मणिपुर में कथित तौर पर नगा सशस्त्र समूहों की हिंसा और गतिविधियों के कारण कुकी-जो समुदाय के 22 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। परिषद ने राजनीतिक और नागरिक समाज के नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस नगा-कुकी-जो हिंसा को रोकने और आपसी मेल-मिलाप की दिशा में कोई ठोस व सार्थक प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

    सशस्त्र समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग

    परिषद ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि वे सशस्त्र समूहों के खिलाफ जल्द से जल्द निर्णायक कार्रवाई करें। उनका कहना है कि मणिपुर की धरती पर किसी भी असंवैधानिक या सशस्त्र संगठन को खुली छूट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इस तरह की लगातार हिंसा राज्य को एक बार फिर बड़े संकट की ओर धकेल सकती है।

    मई 2023 से जारी है जातीय संघर्ष

    गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से ही घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों के कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष का दौर जारी है। इस लंबे और दुखद संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस हिंसा की वजह से हजारों लोग अपने घरों से उजड़कर विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं।

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