भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को शिकस्त देकर आठवीं बार एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया। पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए भारत ने खिताबी जीत हासिल की। हालांकि, गेंदबाजी और शीर्ष क्रम की मजबूत बल्लेबाजी ने भले ही टीम की नैया पार लगा दी, लेकिन मध्यक्रम के निराशाजनक प्रदर्शन और खराब फील्डिंग ने भविष्य के बड़े मुकाबलों से पहले चिंताएं बढ़ा दी हैं।
शेफाली वर्मा का बदला हुआ आक्रामक अंदाज
टूर्नामेंट की सबसे बड़ी उपलब्धि शेफाली वर्मा का शानदार प्रदर्शन रहा। उन्होंने पूरे एशिया कप में 171.01 के जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 236 रन बनाए। इस बार शेफाली के खेल में केवल आक्रामकता ही नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप धैर्य भी नजर आया। उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल सहित तीन महत्वपूर्ण अर्धशतक जड़े। इसके अतिरिक्त उन्होंने नियमित गेंदबाजी करते हुए टीम को एक उपयोगी ऑलराउंडर का विकल्प भी प्रदान किया।
नंदनी शर्मा और प्रेमा रावत ने दिखाया दम
नंदनी शर्मा और प्रेमा रावत ने अपने पदार्पण टूर्नामेंट में बेहतरीन छाप छोड़ी। नंदनी ने पावरप्ले में प्रभावी गेंदबाजी करते हुए 4.64 की किफायती इकॉनमी रेट से 7 विकेट चटकाए, जो किसी भी तेज गेंदबाज के लिए तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। वहीं, युवा लेग स्पिनर प्रेमा रावत ने 7 विकेट लेकर मध्यक्रम की रीढ़ तोड़ी। विशेषकर पाकिस्तान के विरुद्ध उन्होंने 3 विकेट लेकर मैच का रुख बदल दिया।
मध्यक्रम ने बार-बार किया निराश
भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी पहेली उसका मध्यक्रम रहा। थाईलैंड के विरुद्ध टीम ने 46 रन के भीतर 8 विकेट गंवा दिए थे, तो हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ नंबर तीन से सात तक के बल्लेबाज मिलकर 39 गेंदों में केवल 34 रन ही बना सके। फाइनल में भी 129/0 के मजबूत स्कोर के बाद 167/5 पर पारी सिमट गई। टूर्नामेंट में भारत के नंबर 3 से 7 तक के बल्लेबाजों का औसत मात्र 15.25 रहा। जेमिमा रोड्रिग्स की अनुपस्थिति में मध्यक्रम पूरी तरह लड़खड़ाता नजर आया।
बीच के ओवरों में घटी रन गति
स्पिन-अनुकूल पिचों पर भारत के मध्यक्रम बल्लेबाज तेजी से रन बनाने में संघर्ष करते दिखे। 7वें से 11वें ओवर के मध्य भारत का स्ट्राइक रेट 129.41 था, जो 12वें से 16वें ओवर के बीच घटकर 120.00 रह गया। इसके विपरीत श्रीलंका, बांग्लादेश और थाईलैंड जैसी टीमों ने इन ओवरों में अपनी रन गति बढ़ाई। कप्तान हरमनप्रीत कौर भी पूरे टूर्नामेंट में 91.02 के मामूली स्ट्राइक रेट से ही रन बना सकीं।
महिला एशिया कप: विभिन्न टीमों के मध्यक्रम का प्रदर्शन
| टीम | ओवर 7-11 (स्ट्राइक रेट) | ओवर 12-16 (स्ट्राइक रेट) | प्रदर्शन में बदलाव |
| भारत | 129.41 | 120.00 | -9.41 |
| श्रीलंका | 99.23 | 103.33 | +4.10 |
| पाकिस्तान | 84.16 | 72.72 | -11.44 |
| बांग्लादेश | 84.16 | 96.66 | +12.50 |
| यूएई | 75.55 | 82.19 | +6.64 |
| हॉन्गकॉन्ग | 62.22 | 80.00 | +17.78 |
| थाईलैंड | 40.00 | 82.22 | +42.22 |
| इंडोनेशिया | 37.77 | 41.11 | +3.34 |
14 कैच छोड़ना बनी बड़ी चिंता
खिताबी जीत के बीच भारत का फील्डिंग प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में कुल 14 कैच टपकाए, जिसमें से अकेले 5 कैच फाइनल मुकाबले में छूटे। मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने भी स्वीकार किया कि आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं से पूर्व फील्डिंग और मध्यक्रम के लचर प्रदर्शन में सुधार करना टीम प्रबंधन की पहली प्राथमिकता होगी।


