मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने बीड के पटोदा में अपना 20 दिन लंबा अनशन समाप्त कर दिया है। महायुति सरकार के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता और मिले आश्वासन के बाद जरांगे ने अनशन वापस लेते हुए राज्य सरकार को मांगों के समाधान के लिए 3 महीने (90 दिन) का समय दिया है।
पेरिस से सधा समन्वय: 7 दौर की वार्ता
पेरिस में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने गए महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने इस अनशन को समाप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बैकचैनल कूटनीति: उद्योग मंत्री ने पेरिस से ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और जरांगे पाटिल के सहयोगियों के बीच लगातार संवाद स्थापित किया और करीब 7 बार बातचीत कराई।
कॉन्फ्रेंस कॉल: मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और बीजेपी नेता प्रसाद लाड के बीच हुई कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने और वार्ता का रास्ता खोलने की रणनीति तैयार की गई।
3 महीने की समयसीमा और मुंबई मार्च स्थगित
बीड के पटोदा में पहुंचे सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ सहमति बनने के बाद मनोज जरांगे ने अपना विरोध प्रदर्शन फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की।
अल्टीमेटम: जरांगे ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अगले 90 दिनों में कुनबी प्रमाणपत्र और जीआर संशोधन की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती है, तो वे मराठा समुदाय के साथ फिर से मुंबई की ओर रुख करेंगे।
शांति की अपील: अनशन समाप्त करने के साथ ही जरांगे ने मुंबई की ओर बढ़ रहे समर्थकों से शांतिपूर्वक अपने-अपने गांवों को लौटने का आग्रह किया।


