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    स्पेशल कंपोनेंट प्लान वाले मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण को लेकर मायावती ने उठाई आवाज

    लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से 'स्पेशल कंपोनेंट प्लान' के तहत निर्मित मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के अतिरिक्त आरक्षण मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में त्वरित अपील करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल भुगतान पर संभावित शुल्क और प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है।

    मेडिकल कॉलेजों में एससी आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाए सरकार

    बसपा प्रमुख ने बयान जारी करते हुए कहा कि सहारनपुर, आंबेडकरनगर, कन्नौज और जालौन में 'स्पेशल कंपोनेंट प्लान' के बजट से निर्मित मेडिकल कॉलेजों में एससी वर्ग के लिए 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा इस पर रोक लगाए जाने के बाद अब मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल प्रभाव से सुप्रीम कोर्ट में जनहित और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए याचिका दाखिल कर मजबूती से पैरवी करनी चाहिए।

    यूपीआई भुगतान पर शुल्क वसूलना आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ

    डिजिटल लेनदेन पर संभावित शुल्क की खबरों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पहले यूपीआई भुगतान को खूब बढ़ावा दिया गया और अब शुल्क वसूलने की तैयारी की जा रही है। यह रवैया मुनाफाखोरी की नीति को दर्शाता है, जिससे जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूला जा रहा है। देश की बहुसंख्यक आबादी पहले से ही गरीबी और महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे समय में सरकार की नीतियां व्यावसायिक लाभ कमाने के बजाय जनकल्याणकारी होनी चाहिए।

    'स्मार्ट स्कूल' से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दे राज्य सरकार

    प्रदेश के 14,500 प्राथमिक विद्यालयों को 300 करोड़ रुपये की लागत से 'स्मार्ट स्कूल' बनाने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक डिजिटल पढ़ाई से पहले बच्चों को बुनियादी सुविधाएं मिलना आवश्यक है। स्कूलों में पक्की छत, बैठने के लिए बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी प्राथमिक जरूरतें पूरी होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रति स्कूल लगभग दो लाख रुपये के बजट में ये सभी बुनियादी सुविधाएं और स्मार्ट शिक्षा संभव हो पाएगी, इस पर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करना चाहिए।

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