नई दिल्ली। भारत इस समय पिछले 17 वर्षों के सबसे कम बारिश वाले मानसून सीजन की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। मॉनसून के अंतिम दौर में भी बादलों की बेरुखी बनी हुई है, जिससे कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
17 साल का सबसे कमजोर मानसून और बारिश की भारी कमी
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल 18 सितंबर तक जून से सितंबर के पूरे मानसून सीजन के दौरान देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जबकि मौसम विभाग ने शुरुआत में सामान्य से केवल 8% कम बारिश का अनुमान जताया था। यदि यह कमी इसी तरह बनी रही, तो यह वर्ष 2009 के बाद देश का सबसे कमजोर मानसून साबित होगा, जब सामान्य से 18% कम बारिश हुई थी। सितंबर के महीने में देश के कुछ हिस्सों में तो सामान्य से 50% तक कम पानी गिरा है, जबकि भारत की कुल जल आवश्यकता का 70% हिस्सा इसी मानसून सीजन से पूरा होता है।
फसलों की बुआई पर असर और चावल के आसमान छूते दाम
कम बारिश का सीधा और बुरा असर धान, दलहन, कपास और मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर तक खरीफ फसलों की कुल बुआई पिछले साल की तुलना में 15 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में दर्ज की गई है।
धान का रकबा: धान की खेती पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है और इसका कुल रकबा 3.73% घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया है।
उत्पादन में गिरावट: एक अनुमान के अनुसार इस बार चावल का कुल उत्पादन एक करोड़ टन तक घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है, जो पिछले साल के रिकॉर्ड उत्पादन से 6.5% कम है।
महंगाई का दबाव: दक्षिण भारत में बुआई का रकबा 30 से 40% तक घटने के कारण प्रीमियम चावल के दाम 50% तक उछल चुके हैं। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश में जो ग्रेड-1 चावल पहले 4,000 रुपये प्रति क्विंटल था, वह बढ़कर अब सीधे 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार के पास वर्तमान में लगभग 5.96 करोड़ टन चावल और धान का सुरक्षित भंडार मौजूद है, जो तय लक्ष्य से काफी अधिक है।
218 जिलों में सूखे जैसे हालात और राज्यों का हाल
देशभर के कुल 802 जिलों में से 218 जिलों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है। विभिन्न राज्यों में बारिश की कमी का आंकड़ा इस प्रकार है:
मेघालय: 59% कमी
आंध्र प्रदेश: 42% कमी
पंजाब: 39% कमी
बिहार: 36% कमी
कर्नाटक: 30% कमी
केरल: 28% कमी
असम: 25% कमी
तमिलनाडु: 23% कमी
राजस्थान और हरियाणा: 22% कमी
तेलंगाना: 20% कमी
इसके विपरीत, कुछ राज्यों में स्थिति थोड़ी अलग रही। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सामान्य से 8% अधिक बारिश (562.7 मिमी) दर्ज की गई, जबकि उत्तराखंड में भी 4% ज्यादा पानी गिरा। वहीं, हिमाचल प्रदेश में 9% और पूरे उत्तर प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश हुई, हालांकि यूपी के कुछ जिलों जैसे गाजियाबाद (59%), देवरिया (73%), शामली (68%) और कानपुर देहात (64%) में बेहद कम बारिश दर्ज की गई है।


