अष्टमी के संयोग से जैन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, निर्वाण लाडू चढ़ाकर भगवान पुष्पदंत का किया स्मरण
अलवर। दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के चल रहे दसलक्षण पर्व के तहत शनिवार को चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की पूजा-अर्चना की गई। अष्टमी के साथ नौवें जैन तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक होने से जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही अभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
स्थानीय स्कीम नंबर 10 स्थित जैन मंदिर में शिविरार्थियों की विशेष उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने विधिवत अभिषेक, पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। भगवान पुष्पदंत के निर्वाण महोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने निर्वाण का लाडू भी अर्पित किया।
मंदिरों में दिनभर चला पूजा-अर्चना का दौर
जैन पत्रकार संघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि दसलक्षण पर्व के चौथे दिन विभिन्न जैन मंदिरों में उत्तम शौच धर्म की पूजा के साथ भगवान पुष्पदंत का निर्वाण महोत्सव मनाया गया।
मंदिरों में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक श्रद्धालु परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचे। कई स्थानों पर विधान चलने के कारण श्रद्धालु दोपहर तक पूजा-अर्चना में शामिल रहे।
सूर्य नगर परिवहन नगर स्थित श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर और अपना घर शालीमार स्थित भगवान वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर सहित अन्य दिगम्बर जैन मंदिरों में भी दसलक्षण पर्व के तहत विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
शाम को प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
दसलक्षण पर्व के दौरान जैन मंदिरों में शाम को आरती के बाद विद्वानों के प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन हो रहा है। श्रद्धालु इन कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्म और संस्कृति से जुड़ रहे हैं।
संतोष में रहना ही उत्तम शौच धर्म
अलवर में वर्षायोग पर ससंघ विराजमान दिगम्बर जैन संत मुनि सौम्य सागर महाराज ने उत्तम शौच धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि अपने में ही संतोषी रहना उत्तम शौच धर्म कहलाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में अनावश्यक लालसा नहीं रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन चलाने के लिए धन अर्जित करना आवश्यक है, लेकिन यदि व्यक्ति धन के प्रति अत्यधिक आसक्त हो जाए तो उसके जीवन में धन के अलावा कुछ नहीं बचता। इसलिए संतोष और संयम के साथ जीवन जीना आवश्यक है।
अंतर्मन की सफाई पर दिया जोर
शिवाजी पार्क स्थित भगवान संभवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में वर्षायोग पर विराजमान मुनि सुभद्र सागर महाराज ने कहा कि अपने भीतर की सफाई करना ही शौच धर्म है। उन्होंने कहा कि केवल बाहरी स्वच्छता पर्याप्त नहीं है, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि भी जरूरी है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि आत्मा की शुद्धि के लिए मन से राग, द्वेष और कषाय को दूर करना होगा। जब तक अंतर्मन की अशुद्धियां दूर नहीं होंगी, तब तक वास्तविक शुद्धता प्राप्त नहीं हो सकती।
दसलक्षण पर्व के चौथे दिन मंदिरों में हुई पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों से अलवर में जैन समाज के बीच आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


