अलवर में छठे दिन श्रद्धालुओं ने सुगंधित धूप अर्पित कर की पूजा, मुनि सौम्य सागर महाराज ने संयम को बताया जीवन की सार्थकता का आधार
अलवर। दिगंबर जैन धर्मावलंबियों के चल रहे दसलक्षण पर्व के छठे दिन सोमवार को उत्तम संयम धर्म की पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही जैन समाज ने सुगंध दशमी का पर्व भी श्रद्धा और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया। शहर के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। सुगंधित धूप अर्पित किए जाने से मंदिर परिसर सुगंध से महक उठे और दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर दिगंबर जैन संत मुनि सौम्य सागर महाराज ने उत्तम संयम धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि संयम के बिना मनुष्य जीवन की सार्थकता अधूरी है। उनके अनुसार इंद्रियों को वश में रखना, जीवन को अनुशासित रखना और मर्यादाओं का पालन करना ही संयम का मूल स्वरूप है।
संयम से सार्थक होता है मनुष्य जीवन
मुनि सौम्य सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन मिलने के बाद यदि व्यक्ति संयम और साधना का मार्ग नहीं अपनाता तो उसका जीवन अपने उद्देश्य से भटक सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संयम को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि मर्यादा में रहकर जीवन जीने से व्यक्ति के आचरण में श्रेष्ठता आती है।
उन्होंने कहा कि दसलक्षण पर्व का उद्देश्य भी मनुष्य को आत्मचिंतन, साधना और संयम की ओर प्रेरित करना है। इंद्रियों पर नियंत्रण रखना और अपने व्यवहार को अनुशासित रखना संयम की महत्वपूर्ण पहचान है।
मुनि श्री ने रात्रि भोजन का त्याग भी संयम की साधना का एक स्वरूप बताते हुए श्रद्धालुओं को संयमित जीवन अपनाने का संदेश दिया।
सुगंध दशमी पर धूप अर्पित कर की पाप कर्मों के क्षय की भावना
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि दसलक्षण पर्व के छठे दिन सुगंध दशमी का पर्व भी मनाया गया। इस अवसर पर जैन मंदिरों में सुगंधित धूप अर्पित की गई और अपने पाप कर्मों के क्षय की भावना के साथ पूजा-अर्चना की गई।
सुगंध दशमी के अवसर पर मंदिरों में धूप अर्पित किए जाने से वातावरण सुगंधित हो उठा। जिन श्रद्धालुओं ने सुगंध दशमी से संबंधित अपने व्रत पूर्ण कर लिए, उन्होंने भी मंदिरों में पूजा-अर्चना की और पूजन सामग्री भेंट की।
जैन भवन का जीवन विकास शिविर बना आकर्षण का केंद्र
अलवर जैन भवन में चल रहा जीवन विकास शिविर भी दसलक्षण पर्व के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शिविर में भाग ले रहे शिविरार्थी धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
शिविर के माध्यम से बच्चों और युवाओं सहित श्रद्धालुओं को जैन दर्शन, धार्मिक संस्कारों और आत्मचिंतन से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। पर्व के दौरान इस प्रकार के आयोजन धार्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना रहे हैं।
सुबह से मंदिरों में शुरू हो जाते हैं धार्मिक आयोजन
दसलक्षण पर्व को लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित दिगंबर जैन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। करीब सुबह 6:30 बजे श्रीजी के अभिषेक के साथ धार्मिक क्रियाओं और पर्व से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत होती है। इसके बाद शांतिधारा और विधि-विधान के साथ पूजन किया जाता है।
शाम के समय कई मंदिरों में महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। महाआरती के दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालु जिनेंद्र भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। कई स्थानों पर भक्ति गीतों के साथ श्रद्धालुओं द्वारा उत्साहपूर्वक नृत्य भी किया जाता है।
रोशनी से जगमगाए मंदिर, बच्चों के कार्यक्रम भी जारी
दसलक्षण पर्व के चलते जैन मंदिरों को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया गया है। शाम के समय मंदिरों की साज-सज्जा और धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
वहीं बच्चों के लिए भी शाम के समय विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे पर्व में बच्चों और युवाओं की सहभागिता भी बढ़ रही है।
22 सितंबर को होगी उत्तम तप धर्म की पूजा
दसलक्षण पर्व के क्रम में 22 सितंबर को उत्तम तप धर्म की पूजा की जाएगी। इसके लिए जैन मंदिरों में धार्मिक तैयारियां जारी हैं। पर्व के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के साथ श्रद्धालु आत्मचिंतन, संयम और साधना की भावना के साथ पर्व मनाएंगे।
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