देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम देश के उन प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां भगवान शिव की आराधना के साथ कई ऐसी परंपराएं और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. जो इसे दूसरे ज्योतिर्लिंगों से अलग पहचान देती हैं. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की एक खास बात यह भी है कि यह ज्योतिर्लिंग होने के साथ-साथ शक्तिपीठ भी है. यही वजह है कि बाबा बैद्यनाथ धाम की पूजा परंपरा में शक्ति की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है. मंदिर की बनावट और यहां की वास्तु व्यवस्था को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. देवघर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत में बाबा बैद्यनाथ मंदिर की इसी खास वास्तु व्यवस्था के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को वास्तु के दृष्टिकोण से भी बेहद खास माना जाता है. मंदिर परिसर की बनावट में दिशाओं का विशेष ध्यान रखा गया है.
क्या कहते है तीर्थपुरोहित
तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के मुताबिक बाबा बैद्यनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए प्रमुख रूप से तीन दरवाजे बताए जाते हैं. इनमें सिंह दरवाजा के साथ पूरब और पश्चिम दिशा की ओर बने प्रवेश द्वार शामिल हैं. मंदिर के सिंह दरवाजा के पास तीन सीढ़ियां भी बनी हुई हैं. धार्मिक और वास्तु मान्यता के अनुसार मंदिर का सिंह दरवाजा ईशान कोण की दिशा में स्थित माना जाता है. वास्तु शास्त्र में ईशान कोण को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि इस दिशा का स्थान ऊंचा और शुभ होना चाहिए. इसी वजह से बाबा बैद्यनाथ मंदिर की बनावट को लेकर तीर्थपुरोहित इसे वास्तु की दृष्टि से भी विशेष बताते हैं. यहां मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि मंदिर की बनावट और दिशा व्यवस्था भी अपने आप में आकर्षण का विषय बनी रहती है.
जल निकासी की व्यवस्था उत्तर दिशा में
वहीं बाबा बैद्यनाथ मंदिर की एक और खास बात यहां होने वाला जलाभिषेक और जल की निकासी व्यवस्था है. तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार वास्तु की मान्यता में जल के प्रवाह की दिशा को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर श्रद्धालुओं की ओर से जो जल अर्पित किया जाता है, उसकी निकासी उत्तर दिशा की ओर होती है. उनका कहना है कि मंदिर की इस व्यवस्था को भी वास्तु के लिहाज से खास माना जाता है. श्रद्धालु जब बाबा के गर्भगृह में जल अर्पित करते हैं तो जल निकासी की व्यवस्था देखकर भी काफी उत्सुक होते हैं. मंदिर की यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही पूजा परंपरा और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के कारण बाबा बैद्यनाथ धाम को दूसरे धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है.
भगवान शिव और माँ पार्वती एक दूसरे के हैं पूरक
बाबा बैद्यनाथ धाम की सबसे खास बातों में भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर की स्थिति भी बताई जाती है. मुख्य मंदिर यानी बाबा बैद्यनाथ के शिवलिंग और माता पार्वती के मंदिर की स्थिति को लेकर भी यहां विशेष धार्मिक मान्यता है. बताया जाता है कि गर्भगृह से देखने पर बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती एक-दूसरे के पूरक रूप में दिखाई देते हैं. हालांकि माता पार्वती का मंदिर मुख्य मंदिर की तुलना में थोड़ी ऊंचाई पर स्थित है, लेकिन दोनों मंदिरों की स्थिति ऐसी है कि गर्भगृह से देखने पर भगवान शिव और माता पार्वती के बीच एक सीधी रेखा जैसी स्थिति दिखाई देती है. यही वजह है कि बाबा बैद्यनाथ धाम को सिर्फ आस्था और धार्मिक मान्यताओं के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी विशेष मंदिर संरचना और वास्तु व्यवस्था के लिए भी जाना जाता है. तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी के अनुसार बाबा बैद्यनाथ मंदिर की यही खास बातें इसे श्रद्धालुओं के लिए और भी रहस्यमय और आकर्षण का केंद्र बनाती हैं.


