More
    Homeराजस्थानजयपुरचुनाव आयोग की साख पर सवाल, देश को जवाब चाहिए: टीकाराम जूली

    चुनाव आयोग की साख पर सवाल, देश को जवाब चाहिए: टीकाराम जूली

    मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर उठी आपत्तियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने पारदर्शिता पर मांगा स्पष्ट जवाब

    जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जूली ने कहा कि चुनाव आयोग देश में निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था के रूप में लंबे समय से अपनी प्रतिष्ठा रखता आया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उसकी कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

    जूली ने यह बयान 23 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के संदर्भ में दिया, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने तथा मतदाता संबंधी आंकड़ों के केंद्रीकरण जैसे विषयों से जुड़ी थीं।

    मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल

    टीकाराम जूली ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग की कार्यशैली, मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनके अनुसार अब सामने आई रिपोर्ट ने इन मुद्दों को और गंभीर बना दिया है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए प्रपत्र में बदलाव और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों तक पहुंच तथा उनके प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

    14 आपत्तियों की रिपोर्ट का किया उल्लेख

    जूली ने कहा कि जब चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था के भीतर ही उसके निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर इस प्रकार की आपत्तियां सामने आती हैं, तो देश के सामने यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन आपत्तियों पर क्या विचार हुआ और उनका समाधान किस प्रकार किया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार विभिन्न फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ आपत्तियां मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी आंकड़ों के प्रबंधन से संबंधित थीं।

    चुनाव आयोग की ओर से भी सामने आया पक्ष

    इस पूरे मामले में चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों की ओर से अलग पक्ष भी सामने आया है। अधिकारियों ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची की सफाई और आंकड़ों से जुड़े कुछ मुद्दों पर सवाल उठाए थे, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

    ऐसे में सामने आई रिपोर्ट और आयोग से जुड़े अधिकारियों के पक्ष के बीच तथ्यात्मक स्थिति को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है। जूली ने इसी संदर्भ में चुनाव आयोग से उठे सवालों पर स्पष्ट जवाब देशवासियों के सामने रखने की मांग की है।

    लोकतांत्रिक जनादेश की पारदर्शिता पर जोर

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव केवल सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाता के अधिकार और जनादेश की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान और परिणाम तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित हो रही है।

    जूली के अनुसार चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार के संदेह का समाधान तथ्यों और स्पष्ट जानकारी के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    राजस्थान के निकाय चुनावों का भी किया उल्लेख

    टीकाराम जूली ने राजस्थान में हाल ही में हुए नगरीय निकाय चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन चुनावों के दौरान कांग्रेस ने सत्ता तंत्र के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की शिकायतें उठाई थीं।

    जूली ने दावा किया कि प्रशासनिक मशीनरी और सत्ता के प्रभाव के कथित इस्तेमाल से लोकतांत्रिक आवाज को प्रभावित करने के प्रयास हुए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान के आधार पर नहीं हुई है और इन्हें जूली के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    चुनाव आयोग से स्पष्ट जवाब की मांग

    जूली ने कहा कि चुनाव कराने वाली संस्था पर जनता का भरोसा लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सामने आए सवालों पर स्पष्ट जवाब देशवासियों के सामने आना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि मतदाता का अधिकार सुरक्षित रहना, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता कायम रहना और चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता बनी रहना केवल राजनीतिक दलों का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक से जुड़ा मुद्दा है।

    उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव की विश्वसनीयता जनता के विश्वास से जुड़ी होती है और इस विश्वास को मजबूत बनाए रखने के लिए उठने वाले सवालों का तथ्यात्मक एवं सार्वजनिक स्पष्टीकरण आवश्यक है।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here