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    अगली दिवाली तक चांदी में 71% तेजी का अनुमान, रिपोर्ट ने बताई बड़ी वजह

    नई दिल्ली। त्योहारी सीजन और शादियों के आगामी अवसर से पूर्व यदि आप सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न वाले निवेश विकल्प की तलाश में हैं, तो कीमती धातुओं में चांदी निवेशकों को शानदार मुनाफा देने के स्पष्ट संकेत दे रही है। केडिया एडवाइजरी की ताजा 'दिवाली 2027 सिल्वर रिपोर्ट' के अनुसार, वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग में तीव्र उछाल और खदानों से सीमित आपूर्ति के चलते आने वाले समय में चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है।

    छह माह में 90 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

    रिपोर्ट के अनुसार, चांदी के अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव में आगामी महीनों में भारी तेजी आने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत अगले छह महीनों के भीतर 85 से 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वर्तमान में कॉमेक्स पर चांदी का भाव 65 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना हुआ है।

    दिवाली 2027 तक 120 डॉलर का लक्ष्य

    दीवाली 2027 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी का भाव 120 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकता है। मुद्रा दर (रुपये और डॉलर के उतार-चढ़ाव), आयात शुल्क और अन्य प्रीमियम मानकों को ध्यान में रखें, तो सितंबर 2026 के लगभग ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम के बेंचमार्क मूल्य से बढ़कर घरेलू बाजार में चांदी ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा दरों से लगभग 71 प्रतिशत की बड़ी बढ़त का संकेत है।

    चांदी में तेजी के प्रमुख आर्थिक कारण

    केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के अनुसार, इस बार चांदी की कीमतों में उछाल केवल अनुमानों पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस आर्थिक और औद्योगिक कारण मौजूद हैं:

    • लगातार छठे वर्ष चांदी की किल्लत: वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग और आपूर्ति के बीच 4.63 करोड़ औंस का भारी अंतर (घाटा) रहने का अनुमान है। यह लगातार छठा वर्ष है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कमी बनी हुई है।

    • खनन से उत्पादन बढ़ाना कठिन: चांदी के दाम ऊंचे होने के बावजूद खदानों से इसका निष्कर्षण तेजी से बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2026 में कुल उत्पादन घटकर 84.41 करोड़ औंस रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण यह है कि कुल चांदी उत्पादन का मात्र एक-चौथाई हिस्सा ही प्राथमिक खदानों से प्राप्त होता है, जबकि शेष हिस्सा तांबा, जस्ता और सीसा खनन के सह-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) के रूप में निकलता है।

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