चंडीगढ़| पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बार फिर से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की अटकलें जोरों पर हैं। इन चर्चाओं के बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि संगठनात्मक फेरबदल करना पूरी तरह से कांग्रेस पार्टी का आंतरिक अधिकार है तथा यह राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता राहुल गांधी का विशेषाधिकार भी है। हाईकमान को अच्छी तरह पता है कि किस समय और किस स्थान पर किसे जिम्मेदारी सौंपनी है तथा कब बदलाव करना आवश्यक है।
पूर्व सीएम चन्नी का बयान और सचिन पायलट की भूमिका
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आगे कहा कि पार्टी नेतृत्व ही यह तय करता है कि बदलाव की जरूरत है या नहीं और इस तरह के सांगठनिक फेरबदल पार्टी में निरंतर होते रहते हैं। उन्होंने सचिन पायलट की तारीफ करते हुए कहा कि वे हमारे पड़ोसी राज्य से आए हैं और उनके नेतृत्व व आगमन से पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर एक नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार हुआ है।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे की चर्चाएँ
उधर, प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की खबरों को लेकर वर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का बयान भी सामने आया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे फिलहाल इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं, यदि ऐसा कुछ होगा तो वे खुद सबको इसकी जानकारी दे देंगे, क्योंकि कुछ मुद्दे पूरी तरह से पार्टी के आंतरिक मामले होते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रदेश अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालाँकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या घोषणा सामने नहीं आई है। पार्टी के उच्च सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान को सौंपी गई सचिन पायलट की रिपोर्ट के बाद ही नेतृत्व में बदलाव का रास्ता प्रशस्त हुआ है।
नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में इन नामों पर चर्चा
पार्टी सूत्रों का दावा है कि नए पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष के नाम का ऐलान आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर किया जा सकता है। संभावित दावेदारों की दौड़ में पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला, जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं।
सचिन पायलट द्वारा फीडबैक लेने की प्रक्रिया
गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी ने बीते 5 सितंबर को सचिन पायलट को पंजाब मामलों का नया प्रभारी नियुक्त किया था। उन्होंने भूपेश बघेल का स्थान लेते हुए यह जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद से ही पायलट ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक लगातार बैठकें कीं और पार्टी नेताओं की समस्याओं को सुना। उन्होंने पंजाब का दौरा कर विभिन्न गुटों और गैर-गुटीय नेताओं से जमीनी फीडबैक भी एकत्र किया था। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें पंजाब इकाई में चल रहे आपसी गतिरोध और असंतोष को दूर करने का विशेष दायित्व सौंपा था। सूत्रों का कहना है कि पायलट की रिपोर्ट में गुटबाजी और कामकाज से जुड़े मुद्दों का जिक्र है, जिसके आधार पर हाईकमान ने यह बड़ा कदम उठाया है।


