मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में उस समय भारी उबाल आ गया जब महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सोमवार आधी रात को मुंबई के दादर स्थित पार्टी मुख्यालय 'तिलक भवन' में पुलिस ने जबरन धावा बोल दिया। कांग्रेस का आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान नासिक से आए हुए आदिवासी छात्रों और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बलपूर्वक हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों में विरोध के सुर तेज हो गए हैं और कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की कड़ी चेतावनी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि हिरासत में लिए गए सभी आदिवासी छात्रों और कार्यकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से रिहा नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास 'वर्षा' का अनिश्चितकालीन घेराव करेगी। कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में छात्रों की जायज मांगों को दबाने के लिए पुलिस बल का इस तरह से दुरुपयोग करना पूरी तरह से तानाशाही रवैया है।
आदिवासी छात्रों के आंदोलन की मुख्य वजह
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, ये आदिवासी छात्र पिछले 10 दिनों से अपनी विभिन्न न्यायसंगत मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) समय पर जारी करना, आश्रम स्कूलों की स्थिति सुधारना और राज्य के छात्रवासों में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव दूर करना शामिल है। नासिक से पैदल और बसों के माध्यम से मुंबई पहुंचे इन छात्रों की योजना ऐतिहासिक आजाद मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की थी, जिसके तहत वे रात गुजारने के लिए दादर स्थित तिलक भवन में ठहरे हुए थे। सपकाल का आरोप है कि इसी दौरान आधी रात को पुलिस ने पार्टी कार्यालय की पवित्रता को दरकिनार करते हुए अंदर प्रवेश किया, छात्रों को बुरी तरह धमकाया और कई लोगों को जबरन उठाकर अपने साथ ले गई।
मुंबई पुलिस का पक्ष और स्पष्टीकरण
दूसरी ओर, मुंबई पुलिस ने कांग्रेस पार्टी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मनीष कलवानिया ने स्पष्ट किया कि तिलक भवन के भीतर से किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, इन प्रदर्शनकारी छात्रों और कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के आधिकारिक आवास 'राज भवन' (जिसे लोक भवन भी कहा जाता है) की ओर अनधिकृत रूप से मार्च निकालने का पहले ही आह्वान किया था। जैसे ही ये लोग लोक भवन की तरफ बढ़ने की तैयारी कर रहे थे, तो कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस ने उन्हें अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया और उनके खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


