More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशइंदौर में पुराने जल स्रोतों की लौटेगी रौनक, कुएं और बावड़ियां बनेंगे...

    इंदौर में पुराने जल स्रोतों की लौटेगी रौनक, कुएं और बावड़ियां बनेंगे जल संकट का समाधान

    इंदौर: स्वच्छता के क्षेत्र में अग्रणी इंदौर शहर में इस वर्ष औसत से कम बारिश होने के कारण आने वाले दिनों में जल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए इंदौर नगर निगम ने शहर के पारंपरिक और प्राकृतिक जल स्रोतों का सहारा लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। निगम प्रशासन की योजना के अनुसार, शहर के प्रत्येक वार्ड में कम से कम एक प्रमुख कुएं या बावड़ी पर 'हाइड्रेट' का निर्माण किया जाएगा। इन्हीं हाइड्रेट्स के जरिए संबंधित वार्डों के जलापूर्ति से वंचित और समस्याग्रस्त क्षेत्रों में नियमित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

    जनवरी से गहरा सकता है संकट, बनेगा वार्ड-वार वाटर मास्टर प्लान

    मानसून के दौरान कम वर्षा होने के चलते यह तय माना जा रहा है कि वर्ष 2027 की शुरुआत यानी जनवरी माह से ही शहरवासियों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इस संभावित पेयजल संकट को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने समय रहते अपनी अग्रिम रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, पानी की बर्बादी रोकने और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शहर स्तर पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक वार्ड की भौगोलिक स्थिति के अनुसार एक समर्पित 'वाटर मास्टर प्लान' भी तैयार किया जा रहा है।

    नर्मदा लाइन से वंचित इलाकों का सर्वे, प्राकृतिक स्रोतों की पहचान

    तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान के तहत उन सभी बस्तियों और कॉलोनियों को सूचीबद्ध किया जा रहा है, जहां अब तक नर्मदा पेयजल की मुख्य सप्लाई लाइन नहीं पहुंच सकी है और जहां के निवासी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह ट्यूबवेल (बोरिंग) पर निर्भर हैं। ऐसे इलाकों को चिन्हित कर उनकी कुल जल खपत का सटीक आकलन किया जाएगा। महापौर ने स्पष्ट किया है कि हर वार्ड के पारंपरिक कुओं और बावड़ियों पर हाइड्रेट बनाने के लिए अधिकारियों को तत्काल सर्वे कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दे दिए गए हैं।

    यशवंत सागर को नर्मदा-शिप्रा लिंक से मिलेगा जल, ड्रेनेज वाटर का उपयोग

    शहर के लिए राहत भरी खबर यह है कि राज्य सरकार ने यशवंत सागर तालाब का जलस्तर घटने की स्थिति में उसे 'नर्मदा शिप्रा लिंक योजना' के माध्यम से भरने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से यशवंत सागर से प्रतिदिन मिलने वाले 30 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) पानी की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है। इसके अलावा, शोधित (ट्रीटेड) ड्रेनेज वाटर को व्यावसायिक और निर्माण कार्यों तक पहुंचाने के लिए अलग से टैंकर तैनात किए जाएंगे, ताकि पीने योग्य पानी का गैर-पेयजल कार्यों में उपयोग रोका जा सके।

    जनवरी से वॉशिंग सेंटर होंगे बंद, लागू होगी नई जल नीति

    शहर में पानी की फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़े कदम उठाते हुए जनवरी महीने से सभी व्यावसायिक वॉशिंग सेंटरों के संचालन पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई गई है। पूरे इंदौर शहर के लिए एक व्यापक 'नई जल नीति' का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसे आगामी सप्ताह में आयोजित होने वाली महापौर परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस नई नीति के कड़े प्रावधानों को लागू कर शहर को संभावित जल संकट से सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जाएगा।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here