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    रामचरितमानस से हनुमान चालीसा तक, मोरारी बापू ने तुलसीदास की रचनाओं पर क्या कहा?

    कन्याकुमारी: प्रसिद्ध संत मोरारी बापू ने कहा है कि कैप्टन स्मित मच्छार ने पूरी दुनिया के सामने हनुमान चालीसा की महत्ता को पूरी तरह से साबित कर दिया है। यह महत्ता और उपयोगिता हनुमान अंश के माध्यम से उस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की है, जो हमेशा संपूर्ण विश्व के कल्याण की भावना रखती है।

    कन्याकुमारी से शुभारंभ और 23 अक्टूबर को केदारनाथ में पूर्णाहुति

    लगभग 9,000 किलोमीटर लंबी 'स्वास्तिक यात्रा' की शुरुआत करने के अवसर पर मोरारी बापू ने अपने संदेश में कहा कि देश के युवाओं को यह सीखना चाहिए कि उनकी ऊर्जा का किस प्रकार सही उपयोग कर उसे समाज और विश्व के कल्याण में लगाया जाए। दक्षिण भारत के कन्याकुमारी से आरंभ हुई यह विशेष यात्रा आगामी 23 अक्टूबर को देवभूमि केदारनाथ में भव्य पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगी।

    'तुलसीदास को स्त्री विरोधी बताने वालों को पढ़ना चाहिए रामचरितमानस'

    वर्तमान समय में तेजी से बदलती दुनिया का जिक्र करते हुए बापू ने कहा कि आज कई देश भारत की प्रगति से ईर्ष्या रखते हैं और उसकी विकास गति को बाधित करने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हमें इनसे बिना विचलित हुए लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। कन्याकुमारी में स्थित विवेकानंद केंद्र के समुद्र तट पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कथा वाचन करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग गोस्वामी तुलसीदास को स्त्री विरोधी बताते हैं, उन्हें एक बार श्री रामचरितमानस का पाठ अवश्य करना चाहिए। तुलसीदास जी ने ग्रंथ की शुरुआत में ही भगवान शिव से पहले 'शक्ति' और प्रभु राम से पहले 'माता सीता' की वंदना की है।

    'विविधताओं में एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत'

    मोरारी बापू ने आगे कहा कि लोकभाषा में रचे जाने और सरल रूप में जन-जन तक पहुंचने के कारण ही रामचरितमानस इतनी अधिक लोकप्रिय हुई। विविधताओं में एकता का यह अनूठा गुण ही है जिसके कारण भारत आज पूरी दुनिया की ईर्ष्या और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हमें हर हाल में अपनी इस सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित रखना चाहिए। कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पर आयोजित यात्रा के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली थी और अब यह देश आध्यात्मिक रूप से भी निरंतर समृद्ध हो रहा है। इस पूरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य यही है कि भारत अपनी महान आध्यात्मिक ऊर्जा के बल पर और अधिक मजबूत हो।

    'तीर्थयात्रा सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पिरोवन है'

    इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद केंद्र की सचिव राधा ने कहा कि यह यात्रा केवल एक भौगोलिक दूरी तय करने का माध्यम नहीं है, बल्कि पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एक सूत्र में पिरोने का पवित्र प्रयास है। श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य के प्रतिनिधि के रूप में पधारे आचार्य आनंद ने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में तीर्थयात्रा का विशेष महत्व है, लेकिन हमारे शास्त्रों में तो संत-महात्माओं और साधुओं को 'चलता-फिरता तीर्थ' कहकर उनके महत्व को और अधिक रेखांकित किया गया है। कार्यक्रम के अंत में यात्रा के मुख्य संयोजक मदन पालीवाल और रूपेश व्यास ने आए हुए सभी अतिथि संतों का पारंपरिक स्वागत किया। इसके पश्चात मोरारी बापू एवं अन्य संत-महात्माओं ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर इस विशेष ट्रेन को रवाना किया।

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