तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहा तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 3 नवंबर तक ईरान पर सीधे सैन्य हमले से फिलहाल परहेज करने के फैसले के बावजूद, अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अपने रुख पर पूरी तरह कायम है। दूसरी ओर, ईरान ने भी दो टूक कह दिया है कि वह किसी भी स्थिति में अपने संवर्धित यूरेनियम (इनरिच्ड यूरेनियम) को नहीं छोड़ेगा। इस बढ़ते गतिरोध के बीच अमेरिका द्वारा ईरानी धरती पर सीधे सैन्य कार्रवाई किए जाने की आशंकाएं काफी बढ़ गई हैं, जिससे दोनों देशों के बीच कभी भी बड़े संघर्ष के भड़कने के आसार हैं।
सीमाओं पर 50 से अधिक लड़ाकू इकाइयों की तैनाती
इस संभावित खतरे से निपटने के लिए ईरान ने अपनी सीमाओं पर 50 से अधिक खतरनाक और प्रशिक्षित लड़ाकू इकाइयों को तैनात कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान को आशंका है कि अमेरिकी सेना चार प्रमुख रणनीतिक ठिकानों से घुसपैठ कर सकती है, जिसके चलते इन संवेदनशील सीमाओं पर सुरक्षा चक्र को अत्यधिक मजबूत कर दिया गया है। इसके साथ ही, ईरानी सेना अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता और मारक धार को तेजी से उन्नत कर रही है ताकि किसी भी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमी निया ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ पिछले संघर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए देश की मिसाइलों की रेंज में बड़ा विस्तार किया जा रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचेंगी मिसाइलें
ईरानी सेना के अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना के अड्डे और ठिकाने ईरानी समुद्री सीमाओं और तटों से लगभग 1,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इस भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से मिसाइलों की रेंज बढ़ाना ईरान के लिए अनिवार्य हो गया है। इस घोषणा का सीधा अर्थ यह है कि ईरान अपनी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को अपग्रेड कर रहा है ताकि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी युद्धपोत और पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने सीधे तौर पर उसकी जद में आ सकें।
सामरिक मोर्चों पर सेना की मुस्तैदी
ईरानी सेना के ब्रिगेडियर जनरल जहांशाही ने पुष्टि की है कि देश की सीमाओं पर युद्धक टुकड़ियों को पहले ही पूरी ताकत के साथ उतार दिया गया है। दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में अचानक होने वाले हमलों से निपटने के लिए रैपिड रिएक्शन टीमें और भारी तोपखाने को पूरी तरह मुस्तैद किया गया है। पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी इलाकों में विशेष अभियान इकाइयां और मजबूत सीमा सुरक्षा ग्रिड सक्रिय कर दिए गए हैं। इसके अलावा, ओमान की खाड़ी से सटे मकरान तट पर नौसेना और थल सेना मिलकर संयुक्त पहरा दे रहे हैं ताकि समुद्री मार्ग से किसी भी घुसपैठ को नाकाम किया जा सके।
रणनीतिक उद्देश्य और वैश्विक प्रतिक्रिया
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के इन कड़े सैन्य कदमों के पीछे मुख्य रूप से दो उद्देश्य हैं: पहला, अमेरिका और उसके सहयोगियों के मन में यह स्पष्ट संदेश देना कि ईरान की भूमि पर सीधा सैन्य हमला बहुत भारी पड़ेगा; और दूसरा, यदि अमेरिका या इजराइल कोई आक्रामक कदम उठाते हैं, तो ईरान एक साथ कई मोर्चों पर आक्रामक जवाब देने में सक्षम हो। ईरान ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। वर्तमान हालात में पश्चिम एशिया का यह तनाव और गहरा गया है, और पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस रणनीतिक चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया देता है।


