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    Homeराज्यमध्यप्रदेशमहाराष्ट्र की तर्ज पर एमपी में बनेंगे एक्सप्रेस-वे, कनेक्टिविटी सुधारने की तैयारी

    महाराष्ट्र की तर्ज पर एमपी में बनेंगे एक्सप्रेस-वे, कनेक्टिविटी सुधारने की तैयारी

    भोपाल। मध्य प्रदेश में अस्सी हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले सात बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण को लेकर एक बड़ी वित्तीय चुनौती सामने आ रही है। एक साथ इतने बड़े सड़क प्रोजेक्ट शुरू होने से राज्य के बजट पर भारी वित्तीय दबाव पड़ सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) अब महाराष्ट्र के तर्ज पर परियोजना आधारित कंपनियां (स्पेशल पर्पज व्हीकल – एसपीवी) बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

    ऋण जुटाने और प्रबंधन का नया ढांचा

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़े एक्सप्रेस-वे और हाईवे के लिए अलग-अलग एसपीवी का गठन किया जाएगा। ये कंपनियां बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सीधे कर्ज जुटा सकेंगी। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य केवल धन जुटाना नहीं, बल्कि परियोजना के निर्माण अनुबंधों, टोल वसूली और रखरखाव को एक स्वतंत्र ढांचे में चलाना है, जिससे सरकार के सीधे बजट पर निर्भरता कम हो सके। हालांकि, इस पूरी व्यवस्था की सफलता सडक़ों से होने वाली आय और परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी।

    टोल की कमाई बनेगी कर्ज अदायगी का आधार

    एसपीवी मॉडल में संबंधित सड़क की संभावित टोल आय को ध्यान में रखकर कर्ज लिया जाता है। सड़क तैयार होने के बाद उससे मिलने वाले राजस्व का उपयोग ऋण चुकाने और रखरखाव के लिए किया जाएगा। एमपीआरडीसी इस मॉडल के जरिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और अन्य एजेंसियों के प्रोजेक्ट भी अपने हाथ में लेने की संभावना तलाश रहा है। इसके साथ ही, लोक निर्माण विभाग भी क्लस्टर आधारित एसपीवी मॉडल अपनाने की तैयारी कर रहा है।

    आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे कॉरिडोर

    इन प्रस्तावित कॉरिडोर को केवल यातायात मार्गों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इनके किनारे स्मार्ट सिटी, टाउनशिप और व्यावसायिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, इतनी बड़ी योजनाओं को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारने के लिए केवल कंपनियों का गठन काफी नहीं होगा, बल्कि वित्तीय जोखिम, लागत अनुमान और यातायात के आंकड़ों का सटीक आकलन करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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