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    3500 बेटियों ने मिलकर उकेरी मां की ममता, रंगोली में जीवंत हुआ मां-बच्चे का वात्सल्य

    भोपाल : आमतौर पर रंगोली रंगों से सजती है, लेकिन झाबुआ में नजारा कुछ ऐसा था कि रंगों की जगह इंसान ही रंग बन गए। करीब 3500 स्कूली छात्राओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मिलकर मां की गोद में दुलार पाते बच्चे की ऐसी आकर्षक मानव रंगोली रची कि मातृत्व का भाव मैदान में साकार हो उठा। पीजी कॉलेज ग्राउंड में सजी इस अनूठी रंगोली ने देखने वालों को चौंकाया भी और मां-बच्चे के रिश्ते की आत्मीयता का अहसास भी कराया। ‘सेवा के रंग राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम के तहत आयोजित इस सामूहिक प्रस्तुति का संदेश स्पष्ट था—मां सशक्त होगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत बनेगा।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में ‘सशक्त मां-सशक्त भारत’ की थीम पर हजारों प्रतिभागियों ने एक साथ निर्धारित आकार में बैठकर मां और बच्चे की आकृति बनायी। इतने बड़े समूह का एक साथ, एक ही डिजाइन में ढलना अपने आप में आकर्षण का केंद्र रहा। जनजातीय बहुल झाबुआ में यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, सामूहिक एकता और जनभागीदारी की प्रभावशाली मिसाल बना।

    सशक्त मां ही सशक्त राष्ट्र की नींव – मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया

    महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि मानव रंगोली के लिए चयनित प्रदेश के छह जिलों में झाबुआ का शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि मां परिवार की आधारशिला है। शिक्षित, स्वस्थ और जागरूक मां बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के साथ सशक्त समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है।

     3500 प्रतिभागियों का तालमेल बना आयोजन की असली ताकत

    कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने छात्राओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और आयोजन से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों का एक साथ मानव रंगोली बनाना अनुशासन, टीमवर्क और बेहतर समन्वय का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन दर्शाता है कि सामूहिक सहभागिता से बड़े उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है।

    मानव रंगोली की डिजाइन पीटीआई श्री अमजद खान ने सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य श्रीमती सुप्रिया बिसेन और जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सुश्री मोनिका बघेल के मार्गदर्शन में तैयार की। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्कूली, छात्राओं के अलावा कॉलेज और छात्रावास की 3500 छात्राओं ने दो घंटे तक संयमित होकर आकृति बनाने में सहयोगी रही।

    कला से आगे बढ़कर मातृत्व और महिला सशक्तिकरण का संदेश

    कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आत्मनिर्भरता से जुड़ा विषय है। हजारों प्रतिभागियों से बनी मां-बच्चे की आकृति ने मातृत्व के सम्मान और सामूहिक जिम्मेदारी को प्रतीकात्मक रूप से सामने रखा।

    इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्री भानु भूरिया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जितेन्द्र सिंह चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

     

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