नई दिल्ली। वर्तमान समय में ऑनलाइन भुगतान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। सब्जी खरीदने से लेकर शॉपिंग और बिजली के बिल भरने तक, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने लेनदेन को बेहद आसान बना दिया है। फोनपे, गूगलपे और पेटीएम जैसे ऐप इस डिजिटल क्रांति में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार यूपीआई पेमेंट ऐप्स के बाजार में फोनपे ने अपनी बादशाहत बरकरार रखी है, जबकि गूगलपे दूसरे और पेटीएम तीसरे स्थान पर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यूपीआई पेमेंट ऐप्स की मार्केट शेयर में फोनपे 45.6 फीसदी हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है। गूगलपे 32.3 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर अपनी जगह बनाए हुए है। इन दोनों दिग्गजों की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी लगभग 77.9 फीसदी है, जो दर्शाता है कि यूपीआई इकोसिस्टम पर इनका कितना मजबूत प्रभुत्व है। तीसरे स्थान पर पेटीएम है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी 8 फीसदी है। यह आंकड़ा कई लोगों को हैरान कर सकता है, खासकर पेटीएम की लंबी उपस्थिति और व्यापक उपयोगकर्ता आधार को देखते हुए। अन्य ऐप्स में एनएवीआई 4.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ चौथे स्थान पर है, इसके बाद सुपरमनी (1.7 फीसदी), भीम (1 फीसदी), फेमएप (0.9 फीसदी), वाटसऐपपे (0.7 फीसदी), सीआरईडी (0.6 फीसदी) और एक्सिस बैंक एप (0.6 फीसदी) जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। इस बी यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने की योजना भी चर्चा में है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर 0.4 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया था, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन तय की गई थी। हालांकि, इसे 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था, लेकिन एनपीसीआई ने इस फैसले को दिवाली के बाद तक टाल दिया है। नई तारीख की घोषणा संबंधित पक्षों को बाद में की जाएगी।


