जयपुर में एसीएस आनंद कुमार से मुलाकात, वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने और अभयारण्यों को राष्ट्रीय उद्यान बनाने की मांग
जयपुर। राजस्थान में वनों के संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण सुधार को लेकर पीपुल फॉर एनिमल्स के प्रदेश प्रभारी एवं पर्यावरणविद बाबूलाल जाजू ने पहल की है। उन्होंने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार से शासन सचिवालय में मुलाकात कर इन विषयों से जुड़े 9 सुझाव सौंपे। मुलाकात के दौरान जाजू ने पौधा लगा गमला और पेड़ों की रक्षा के लिए बलिदान देने वाली अमृता देवी विश्नोई का चित्र भी भेंट किया।
वन भूमि के संरक्षण और पौधरोपण पर जोर
बाबूलाल जाजू ने वन विभाग की नर्सरियों में मांग के अनुरूप विभिन्न प्रजातियों के पौधों की उपलब्धता बढ़ाने और बड़े आकार के पौधे तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने वन भूमि पर पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज लाखों हेक्टेयर वन भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त कर उसका अमलदरामद करवाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और विभागीय कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। जाजू के अनुसार, वन क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए पौधरोपण के साथ लगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर बढ़ाना भी जरूरी है।
अतिक्रमण और अवैध कटाई रोकने की मांग
जाजू ने वन भूमि पर अतिक्रमण, पेड़ों की अवैध कटाई और वन्यजीवों के शिकार पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता बताई। इसके लिए उन्होंने वनकर्मियों को आवश्यक अत्याधुनिक शस्त्र और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया, ताकि वन एवं वन्यजीव सुरक्षा से जुड़े कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकें।
उन्होंने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और संरक्षण संबंधी गतिविधियों में जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत भी रेखांकित की।
वन्यजीव प्रेमियों की सेवाएं लेने का सुझाव
पर्यावरणविद ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण के काम में अनुभवी वन्यजीव प्रेमियों की सेवाएं लेने का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार, वन्यजीवों के व्यवहार और उनके संरक्षण के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले लोगों की भागीदारी से संरक्षण संबंधी प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
दो अभयारण्यों को राष्ट्रीय उद्यान बनाने की मांग
जाजू ने कुंभलगढ़ और सीतामाता अभयारण्यों को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उन्होंने उम्मीद जताई कि वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण सुधार से जुड़े इन सुझावों पर अमल होने से राजस्थान में वन क्षेत्र और जैव विविधता को सुरक्षित रखने के प्रयासों को गति मिलेगी।
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